मेडिकल ऑक्सीजन कैसे बनायीं जाती हैं| Medical oxygen How are they made in Hindi. 

दोस्तो, जैसा की आप सभी जानते हैं कि इस कोरोना महामारी के दूसरे प्रभाव से ही भारत को ज्यादा हानि हुई हैं|

कोरोना वायरस की बीमारी ने पूरे भारत को हिला कर रख दिया है| मरीजों की बढ़ती तकलीफ के बीच अस्पतालों में आईसीयू में बेड और ऑक्सीजन की बड़ी चिंता का विषय है|

तो दोस्तों हमारा आज का विषय यह हैं कि ऑक्सीजन कैसे बनाया जाता है ,गैस को शुद्ध कैसे किया जाता है|

तो आइये ऐसे ही महत्वपूर्ण जानकारियों को पढ़ते हैं-

गैस को शुद्ध कैसे किया जाता है?

मेडिकल ऑक्सीजन तैयार करने की प्रक्रिया प्लांट में होती है| कैसे बनायीं जाती हैं इस दौरान हवा में से विभिन्न गैसों से केवल ऑक्सीजन को निकालकर अलग किया जाता है| बता दें कि हवा में ऑक्सीजन लगभग 21% ही होता है, इसके अलावा दूसरी गैसें और धूल भी होती हैं|

इसमें इंसान का सिस्टम केवल ऑक्सीजन लेता है। मरीज के लिए एयर सेपरेशन तकनीक से यही ऑक्सीजन अपने शुद्धतम रूप में अलग की जाती है।

क्या है मेडिकल ऑक्सीजन कैसे तैयार होती?

वातावरण में ऑक्सीजन के अलावा दूसरी गैसें, धूल और नमी भी होती है, जिसे स्वस्थ इंसान का सिस्टम छांटकर अलग कर देता है और शरीर में केवल ऑक्सीजन जाती है।

वहीं मरीज के फेफड़ों में इतनी ताकत नहीं होती और उसे मेडिकल ऑक्सीजन देनी पड़ती है। ये शुद्धतम रूप है। कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी के बीच लगातार ये मांग आ रही है कि उद्योगों को दी जाने वाली सारी ऑक्सीजन, मेडिकल ऑक्सीजन में बदल दी जानी चाहिए।

संकट के बीच केंद्र ने बहुत से उद्योगों के लिए फिलहाल इसकी आपूर्ति रोक भी दी है, इसके बाद भी मेडिकल ऑक्सीजन की कमी हो रही है।

जानिए, आखिर क्या है मेडिकल ऑक्सीजन और किस तरह सांस के लिए जूझते मरीजों की जान बचाने वाली साबित होती है।

WHO ने ऑक्सीजन को कहा अति-आवश्यक दवा-

प्राकृतिक तौर पर ऑक्सीजन वातावरण में मौजूद होती है। ये वो हवा होती है, जिसे स्वस्थ फेफड़ों वाले लोग आसानी से ले पाते हैं, लेकिन जैसे ही सांस की किसी बीमारी से प्रभावित मरीज, जिसमें कोरोना संक्रमण भी शामिल है।

लंग्स पर असर होता है, वो वातावरण से ऑक्सीजन सीधे नहीं ले पाता है। ऐसे में उसे मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।

इसे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने भी अति-आवश्यक मेडिकल जरूरत में शामिल किया। यहां समझें कि मेडिकल ऑक्सीजन एक तरह की दवा है, जिसे केवल डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन पर ही दिया जाता है।

कैसे होता है ऑक्सीजन का उत्पादन?

लिक्विड ऑक्सीजन हल्के नीले रंग की और काफ़ी ठंडी होती है। यह क्रायोजेनिक गैस होती है, जिसका तापमान -183 सेंटिग्रेड होता है। इसे खास सिलिंडरों और टैंकरों में ही ले जाया और रखा जा सकता है।

भारत में लगभग 500 फ़ैक्ट्रियां हवा से ऑक्सीजन निकालने और इसे शुद्ध करने का काम करती हैं। इसके बाद इसे लिक्विड में बदल कर अस्पतालों को भेजा जाता है। ज़्यादातर गैस की सप्लाई टैंकरों से की जाती है।

बड़े अस्पतालों के पास अपने टैंक होते हैं जिनमें ऑक्सीजन भरी जाती है और फिर वहीं से यह मरीज़ के बिस्तर तक सप्लाई होती है।

छोटे और अस्थायी अस्पताल स्टील और एल्यूमीनियम के सिलिंडरों का इस्तेमाल करते हैं।

कोविड संक्रमितों को ऑक्सीजन क्यों चाहिए?

हम सब हवा से ऑक्सीजन लेते हैं। ऑक्सीजन हमारे फेफड़ों के ज़रिए रक्त प्रवाह में शामिल होती है। यह कोशिकाओं तक पहुंचती है, जहां यह रासायनिक ढंग से ग्लूकोज के साथ प्रतिक्रिया करती है।

इसका मतलब यह है कि यह भोजन से ऊर्जा तैयार करता है। यह किसी प्राणी के जीवित रहने के लिए बहुत ज़रूरी प्रक्रिया है।

अगर फेफड़े में कोई समस्या हो गई या माइक्रोबायल संक्रमण हो गया तो ऑक्सीजन के रक्त प्रवाह में शामिल होने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

ऐसी स्थिति में सांस से ली गई ऑक्सीजन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं होती है, ऐसे मरीज़ों को शुद्ध ऑक्सीजन देने की ज़रूरत होती है।

कुछ मामलों में ऑक्सीजन कांसन्ट्रेटर का इस्तेमाल किया जाता है। यह मशीन हवा से ऑक्सीजन को लेकर उसे शुद्ध करके मरीज़ों तक आपूर्ति करती है| इसका इस्तेमाल अपेक्षाकृत आसान है,

लेकिन चिकित्सकों के मुताबिक़ इस तरह से दी जाने वाली ऑक्सीजन कोविड संक्रमित के लिए पर्याप्त नहीं होती हैं।

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Sanjana Singh