क्या अमेरिका को विदेशी छात्रों की कमी के वजह से बड़ा नुकसान होने वाला है?

अमेरिका की अर्थव्यवस्था में बाहर से पढ़ने के लिए आए छात्र एक अहम योगदान देते हैं। वहाँ पढ़ने गए छात्रों की संख्या में बीते सालों के मुताबिक पिछले साल कमी के बावजूद अमेरिकी इकोनॉमी को उनसे 45 अरब डॉलर मिले थे। लेकिन अब छात्रों की दिलचस्पी अमेरिका जाने में अब और भी कम हो रही हैं। इसकी वजह कोरोना का खौफ नही है, बल्कि यहाँ एशियाई मुल्क के लोगों पर बढ़ते हमले भी हैं। दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल इसी विषय पर है। तो आइए दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं-
सिंगापुर का एक छात्र जो अमेरिका पढ़ने के लिए आया उसके बारे में जाने –
सिंगापुर के एक छात्र डाई शियांग रो ने हमेशा से अमेरिका में पढ़ने का सपना देखा। उन्होंने खूब मेहनत की और उन्हें येल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर, साइंस और इकोनॉमिक्स विषय में दाखिल  भी मिल गया। पर 19 वर्ष का यह छात्र दुविधा में है।
उन्होंने अमेरिका जाकर पढ़ने में होने वाली मुश्किलों की क्या वजह बताई-
अमेरिका और दूसरे देशों में हो एशियाई लोगों के साथ रहे नस्लभेद और हिंसा की खबरों ने मेरे जैसे एशियाई  लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इससे मेरे और मेरे दोस्तों को दूसरे देश में जाकर पढ़ने को लेकर  धक्का पहुंचा है। शायद यह महामारी की वजह से है, लेकिन कहीं ना कहीं इसमे नस्लभेद झलकता है, जो लोगों के जहन में है।
साल दर साल अमेरिका में अंतराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है-
अमेरिका में साल 2019-2020 के सत्र में अंतराष्ट्रीय  छात्रों की संख्या में 16 फीसदी की गिरावट देखी गई। इस साल के सत्र में यह गिरावट बढ़कर 43 फीसदी हो गई। स्वास्थ्य को लेकर चिंता इसकी सबसे बड़ी वजह है, क्योंकि कोरोना वायरस की सबसे ज्यादा मार अमेरिका पर पड़ी थी।
अंतराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में गिरावट आने की वजह क्या है-
एशियाई मूल के लोगों पर नस्लभेद और हिंसा की खबरें भी कई छात्रों को आवेदन करने से रोक रही हैं।
इसके लिए कई लोग पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन विरोधी बयानों को जिम्मेदार मानते हैं।
अमेरिका में एशियाई लोगों पर हमले और अटलांटा में 6 औरतों की हत्या जैसी कई खबरों की गूँज एशिया तक सुनी जा सकती है।
अभी भी कई एशियाई छात्र विदेश में रहना चाहते हैं-
अभी भी कई एशियाई छात्र विदेश में रहना चाहते हैं। बावजूद इसके कि वहां पर नस्लभेद की घटनाएँ हो रही है। वह वहाँ पर अपने समुदाय के लोगों के साथ रहना शुरू कर देते हैं और इससे कहीं ना कहीं नस्लभेद को बढ़ावा मिलता है।
छात्रों की संख्या में कमी हुई तो इसका असर  यूनिवर्सिटी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा-
यूनिवर्सिटी को इन छात्रों से काफी पैसा फीस के रूप में मिलता हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी देशों को अपनी छवि बरकरार रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों की जरूरत होती है और अगर इसमें किसी भी तरीके की मुश्किल आई तो यूनिवर्सिटी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर इसका पूरा असर देखा जा सकेगा।

दोस्तों, ‘ आपको हमारा यह आर्टिकल क्या अमेरिका को विदेशी छात्रों की कमी के वजह से बड़ा नुकसान होने वाला है? कैसा लगा? आप हमें कमेंट करके बताए और हमारे इस आर्टिकल को शेयर और लाइक करना ना भूले|

Facebook –Click Here

Twitter – Click Here  

Instagram – Click Here

Thanks
 Sanjana Singh