बच्चों से कोरोना अधिक फैलता है? Coronavirus Spreads More By Children in Hindi?

दोस्तों आज हम कोरोना वायरस के बारे में बात करेंगे। आए दिन को ना पर नए-नए रिसर्च हो रहे हैं नए-नए खुलासे हो रहे हैं

और हमें इसके बारे में नई नई चीजें जानने को मिल रही है। कोरोना वायरस ने हर उम्र के लोगों को प्रभावित किया है।

हालांकि बच्चों में बड़ों की तुलना से कोरोना वायरस का इन्फेक्शन कम है।

लेकिन बच्चों में बड़ों की तुलना से कोरोना वायरस को फैलाने की क्षमता ज्यादा है। यह खुलासा आपका “द जेनरल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन” में पब्लिश हुआ है।

दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल इसी विषय पर है तो आइए दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं- बच्चों से कोरोना अधिक फैलता है? Coronavirus Spreads More By Children in Hindi?

एडल्ट्स के तुलना में कोरोना वायरस बच्चों के द्वारा ज्यादा फैलता है-

इसमें यह पब्लिश हुआ है कि कोरोना वायरस के फैलने की क्षमता बच्चों में एडल्ट्स के तुलना में ज्यादा तेज हैं।

यह स्टडी बताती है कि बच्चे जो हैं कोरोना को ज्यादा फैला सकते हैं। एडल्ट्स की तुलना में इनमें वायरल लोड की क्षमता ज्यादा होती है।

वायरल लोड क्या होता है-

वायरल लोड का मतलब होता है कि वायरस की मात्रा जो कि एक व्यक्ति अपने अंदर रख सकता है। यानी कि बच्चों में एडल्ट के तुलना में वायरल लोड की क्षमता अधिक होने की वजह से यह एडल्ट की तुलना में वायरस को अच्छे ढंग से फैला सकते हैं।

5 साल या उससे यंगर बच्चे जो हैं उनमें वायरल लोड की क्षमता अधिक होती है –

5 साल या उससे यंगर बच्चे जो हैं उनमें वायरल लोड की क्षमता अधिक होती है। ऐसे में उनमें अगर कोविड की माइल्ड या मॉडरेट लक्षण है|

तो उनके नसोफैरिंक्स में जितना कोविड सिम्टम्स होगा वह लगभग समान होगा जितना एक एडल्ट में होता है।

इन यंग बच्चों में कोरोना के लक्षण कम होते है। यह कोरोना से ज्यादा इंफेक्टेड नहीं होते है। यह केवल वायरस को एडल्ट की तुलना में फैलाने में ज्यादा कारगर होते हैं।

शिकागो में 145 मरीजों पर इसके बारे में सर्च किया गया-

शिकागो में 145 मरीजों के सैंपल लिए गए। इन पार्टिसिपेंट्स को तीन हिस्सों में उनके उम्र के मुताबिक बांट दिया गया। पहले ग्रुप उनका था जिनकी उम्र 5 साल के अंदर थी।

दूसरा ग्रुप उन बच्चों का था जिनकी उम्र 5 से 17 साल के बीच की थी और तीसरा ग्रुप एडल्ट का था जिनकी उम्र 18 से 65 साल के बीच की थी।

वैज्ञानिको ने इनके सैंपल्स में यह पाया कि जो यंगर पेशेंट है उनका CT- वैल्यू कम है। CT कम होने का मतलब यह होता है कि पेशेंट में वायरस की उपस्थिति अधिक है।

यानी कि अगर कभी भी किसी के रिजल्ट में CT काम आए तो उसके सैंपल में वायरस की उपस्थिति अधिक होती है।

इस रिसर्च में यह देखा गया कि CT यंगर की तुलना में एडल्ट्स में CT का रिजल्ट अधिक है। इनका करो ना को फैलाने का रिस्क ज्यादा है।

हमें यहां पर क्या नोटिस करना चाहिए-

यहां पर यह नोटिस किया जा रहा है कि यह जो इस ग्रुप है 5 से 17 साल का यह भाई यह वही उम्र के बच्चों का ग्रुप है जो कि स्कूल जाने वाले बच्चों का होता है।

इसलिए हम यह देख रहे हैं कि कोरोना वायरस के दौरान स्कूल जो है पहले बंद कर दिए जा रहे हैं। इससे यह पता चलता है कि यह ग्रुप वायरस को फैलाने में बहुत ज्यादा जिम्मेदार है।

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 Sanjana Singh

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