नरेंद मोदी की सरकार अगर कानून रद्द कर दे, तो किसका भला होगा

दोस्तों, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पिछले 14 दिनों  से  दिल्ली में आंदोलन कर रहे पंजाब, हरियाणा के किसानों का कहना हैं कि भारत को खाद्य संकट से बाहर निकालने में उनका सबसे बड़ा योगदान हैं, इस बात में सच्चाई भी हैं|

तब सरकार ने इन दोनों राज्यों को गेंहू और चावल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया|
सरकार की तरफ से न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को सुनिश्चित किया गया ताकि उन्हें लागत से ज्यादा कीमत मिल सके|
एमएसपी से आज भी सबसे ज्यादा हरियाणा और पंजाब के किसानों का फायदा होता हैं|

सरकार ने इनके लिए दूसरी सब्सिडी भी सुनिश्चित की है-
अब जब भारत खाद्य संकट से बाहर निकल गया है और गेहूं-चावल का उत्पादन इतना हो रहा है कि रखने की जगह नहीं है|
तब सरकार को लगता है कि एमएसपी उसके लिए बोझ है और इसका कोई उपाय होना चाहिए|
मोदी सरकार ने जो नए तीन कानून बनाए हैं उनमें कृषि उपज की मंडी, ख़रीदारी और उत्पादन को नियंत्रण मुक्त करने पर जोर हैं|

पंजाब हरियाणा के किसानों को लग रहा है कि वो बाकी राज्यों के किसानों की तरह हो जाएंगे जिन्हें अपनी उपज औने-पौने दाम में बेचना पड़ता है|
‌ऐसे में वो सड़क पर डटे हुए हैं कि एमएसपी जैसी व्यवस्था सरकारी मंडी हो या निजी मंडी हर जगह अनिवार्य होनी चाहिए|

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