अपने अन्दर छुपे हुनर को पहचाने| Village Boy Motivational Story in Hindi.

अपने अन्दर छुपे हुनर को पहचाने| Village Boy Motivational Story in Hindi.

अपने अन्दर छुपे हुनर को पहचाने| Village Boy Motivational Story in Hindi.


समाज को आगे बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति को  अपने अंदर छुपे हुनर को पहचानना चाहिए| अगर कोई भी सामाज आगे बढ़ता है तो उसके पीछे उस समाज़ के नागरिको का हाथ होता है| किसी समाज़ को आगे बढाने के लिए सबसे अहम भूमिका उस सामाज के नागरिकों का होता है|

और वह जभी आगे बढ़ पाएगा जब उस समाज़ के लोग अपने अंदर के हुनर को समझ पायेंगे ऑफ एक दूसरे को उसके कार्य में मदद करेंगे और ना ही उसके कार्य से जलन करेंगे| तो आइये दोस्तों ऐसी ही एक Motivational Story को पढ़ते है और अपने समाज को विकसित करने में अपना अहम साथ देते हैं-

य़ह कहानी एक गरीब परिवार में छोटे से गांव में पैदा हुए एक व्यक्ति की हैं| उसका नाम लखन है| लखन की जिंदगी में इतना संघर्ष था कि वह बहुत मुश्किल से आठवीं कक्षा तक ही अपनी स्कूल की पढ़ाई कर पाया|  आठवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसने शहर जाने का निर्णय लिया| शहर जाकर लखन नौकरी ढूंढने में लग गया|

एक बार उसने अखबार में एक नौकरी के प्रस्ताव के बारे में पढ़ा| वह जॉब ज़्यादा बड़ी नहीं थी लेकिन उसके नजरिये से उसे वह जॉब पसंद आ गई थी| लखन ने बहुत सोच-विचार किया और फिर डरते-डरते उस नौकरी के लिए प्रार्थना-पत्र दे दिया| उस अखबार से लखन उस दफ्तर के पते पर पहुँचा| वहाँ पहुंचकर उसने देखा कि वहाँ पर जॉब के लिए बहुत लंबी लाइन लगी हुई थी|

कुछ देर बाद उसका इंटरव्यू का नंबर आया| इंटरव्यूयर ने लखन से खूब प्रश्न किये| उन्हीं में किसी एक इंटरव्यूयर ने लखन से पूछा कि क्या तुम्हारे पास ई-मेल आई डी हैं|  लखन तो गांव का बंदा था| उसे पता ही नहीं था कि ई-मेल आई डी होती क्या है| फिर लखन ने उस इंटरव्यूयर से कहा कि जी मेरे पास ई-मेल आई डी नहीं है|

फिर इसके बाद क्या होना था, उस इंटरव्यूयर ने लखन से कहा कि तुम ई-मेल आई डी नहीं जानते| आज के इस टेक्नोलॉजी और मॉडर्न ज़माने में तुम य़ह नहीं जानते कि ई-मेल आई डी होती क्या है| इसके बाद उसे जॉब से निकल दिया गया|

Village Boy Motivational Story

इसके बाद लखन उस दफ्तर के कुछ थोड़ी दूर चला और फिर उसने अपनी जब में रखे पैसों को गिनना शुरू किया| उसके पास कुल 300 रुपये थे| उसने थोड़ी देर विचार-विवश किया और फिर वहां की मंडी से अपने 300 रुपयों के आम खरीदें और उन आमों को गलियों में शाम तक बेच दिया| रात में जब उसने उन बेचे हुए आमों से कमाए पैसे गिने तो वह 400 रुपये थे| उसे बहुत खुशी हुई और फिर सोचा कि अब वह रोज फल ही बेचा करेगा|

अगले दिन उसने उस पैसे से फिर आम खरीदे और उन्हें बेचने के लिए फिर निकल पड़ा| उसको फिर लाभ प्राप्त हुआ| अब लखन रोज आम खरीदता और बेचता और अब कुछ ही दिनों में उसने खुद ही मंडी में एक छोटी से दुकान खरीद ली और उसी में आम के साथ-साथ दूसरे फल भी बेचने लगा| उसने अपनी मेहनत और लगन से उस छोटी से दुकान को भी एक बड़ी सी दुकान में तब्दील कर दिया|

अब उसने अपनी एक दुकान कुछ ही सालों में 7-8 दुकान कर ली | जब वह वापस अपने गाँव गया तो उसने वहाँ अपने दोस्तों और वहाँ के लोगों को बताया कि वह शहर में फल बेचने का कारोबार करता है| वह उन गांव के लोगों को भी शहर जाकर अपने साथ काम करने का सुझाव दिया| वह लोग भी लखन के साथ शहर गए और उसकी दुकान में काम करने लगे|

धीरे-धीरे उन लोगों को भी मुनाफ़ा होने लगा और उन्होंने आस-पास के शहर में अपनी ही किसी ना किसी फल या सब्जी की दुकान खोल ली| अब उस गांव में हर एक व्यक्ति अमीर हो गया था और वह गांव बहुत विकसित हो गया था|  अब लखन एक बहुत बड़ा बिजनेस मेन बन चुका था और पूरा देश उसकी सफ़लता देख रहा था| जब य़ह बात मीडिया वालों को पता चली की लखन ने केवल आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है और वह गांव का एक गरीब परिवार से था| अब वह एक बहुत बड़ा व्यापारी बन चुका है तो वह लखन से उसकी सफ़लता के राज के बारे में पता करने पहुँचे|

उसके पास अलग-अलग चैनल्स से मीडिया वाले पहुंचे| एक दिन उसके पास  एक रिपोर्टर उसका इंटरव्यू लेने आया| उसने लखन से बहुत सारे प्रश्न किए, उसने लखन से उसके संघर्ष, उसने कैसे दुकान खोली और कैसे उसने अपने बिजनेस में बढ़ोतरी की| ऐसे कई  सवाल उसने लखन से पूछे??

आखिरी में उसने लखन से पूछा कि अगर आपके पास ई-मेल आई डी है तो आप हमें दे दीजिए??

हम इस इंटरव्यू के वीडियो को आपके ई-मेल आई पे भेज देंगे|

जैसे उस रिपोर्टर ने य़ह सवाल किया तो लखन जो अब बिजनेस मेन बन चुका था| उसने जबाव दिया कि जी नहीं मेरे पास ई-मेल आई डी नहीं है| वो  रिपोर्टर जो लखन का इंटरव्यू लेने आया था जब उसने लखन के मुँह से ना सुनी तो उसने लखन से पूछा कि, आप इतने बड़े बिजनेस मेन हो लेकिन आप ई-मेल आई डी के बारे में नहीं जानते हैं| इसके बाद लखन ने ही बढ़िया उत्तर दिया कि अगर मेरे पास ई-मेल आई डी होती तो आज में इतना बड़ा फलों का व्यापारी नहीं होता, यही उसकी सफ़लता का राज है|

दोस्तों य़ह छोटी सी कहानी हमें य़ह सीख देती है कि इस जिंदगी सभी में सभी के पास कोई ना कोई हुनर होता है| बस उस हुनर को समझने की देरी होती है| दोस्तों अब दूसरों की नकल करना छोड़ दो और अपने अंदर के हुनर को पहचानो|

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Sanjana

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