वो सात बातें जो हमें धोनी की जर्सी नंबर 7 से सीखनी चाहिए| Seven things we should learn from Dhoni’s jersey number 7.

वो सात बातें जो हमें धोनी की जर्सी नंबर 7 से सीखनी चाहिए-

समुंदर सात हैं, महाद्वीप सात हैं, रश्में सात हैं, कसमें सात हैं, यहाँ तक कि फेरे भी सात हैं|
क्योंकि सात का मतलब हैं ट्रस्ट| माही जब खेलने आते थे, तो सभी को ट्रस्ट रहता था कि हम हारेंगे नहीं| जब भी मैं इंडिया का मैच देखते हुए थोड़ा सा उदास होता था, तो मेरी मम्मी कहती थी अरे बेटा चिंता क्यू कर रहा है, अभी धोनी का आना बाकी है| वहीं माँ 15 अगस्त 2020 को उदास थी, क्योंकि उन्हीं के प्रिय कभी-कभी मूवी के गाने में पल दो पल का शायर हूँ के साथ माही ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया|

19:29 का समय क्यूँ चुना गया, जो माही ने अपने इन्स्टाग्राम पोस्ट में बताया है| उसके पीछे काफी सारी बातें सामने आ रही हैं| पहली बात कहती है कि भारत में गुजरात में गुहारमोती जगह हैं, जहाँ 15 अगस्त को आखिरी सूर्यास्त हुआ था 19:29 पर और शायद धोनी उस सूर्यास्त के साथ में अपने करियर को समाप्ति देना चाहते थे|

दूसरी बात यह सामने आई है कि भारत बनाम न्यू जीलैंड के मैच में साल 2019 में वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जो कि माही का आखिरी खेला गया मैच था, जब भारत ने वो मैच हारा था और जब वो मैच खत्म हुआ था, तो उस समय भारत में 19:29 का समय हो रहा था| दोस्तों इनमे से कौन सी बात सही है य़ह तो माही ही बता पाएंगे| लेकिन हमने इससे जो सीखा उसकी बात करते हैं| दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल “जर्सी नंबर सात से सीखने वाली वो सात बातें” पर हैं|
तो आइए दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं-

1. हम सबको अपनी लाइफ में फॅमिली मेंबर बनना हैं-
सबसे पहली बात जो हमें महेंद्र सिंह धोनी से सीखना चाहिए और सीख सकते हैं कि हम सबको अपनी लाइफ में फॅमिली मेंबर बनना हैं, परिवार का होकर के रहना है| क्योंकि परिवार हमेशा अंत तक आपके साथ रहता है| माही ने अपने दोस्तों को अपनी टीम को अंत तक अपनी फॅमिली माना और फॅमिली को तो फॅमिली वाला प्यार दिया ही| इतना महान बनने के बाद भी, इतना व्यस्त रहने के बाद भी धोनी का टाइम परिवार के लिए हमेशा रहता था|

दोस्तों लाइफ में आप कितने भी बड़े क्यों ना हो जाओ, लेकिन यह हमेशा याद रखना की ऊपर वाले से बड़ा कोई नहीं और सबसे बड़ी बात यह है कि ऊपर वाला जिसके साथ होता हैं, नीचे वाले उसके कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते|

2. लाइफ में रिस्क लेना बहुत जरूरी होता है-

बर्फी मूवी में एक डायलॉग हैं कि रिस्क नहीं लेना ही सबसे बड़ा रिस्क हैं| ये बात आप महेंद्र सिंह धोनी से सीखिए की रिस्क कैसे लेना हैं? 2007 का टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल, जिसका आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा ने डाला था| इस पर काफी बातचीत हुई और फिर सबको समझ में आ गया कि वो जो रिस्क लिया गया था, वो कितना फायदेमंद था| 2007 के उसी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के साथ खेले गए मैच में बोल ऑउट हुआ था| तीन-तीन बॉल दोनों टीमों की तरफ से डालनी थी| अलग-अलग खिलाड़ियों को आना था|

उस समय महेंद्र सिंह धोनी के पास बड़े-बड़े सीनियर खिलाड़ी थे, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने रॉबिन उथप्पा पर भरोसा जताया और टीम ने माही पर भरोसा जताया और फिर इसके बाद टीम इंडिया का स्कोर 3-0 था| लेकिन दोस्तों हमेशा याद रखना कि जिंदगी में सिर्फ रिस्क लेना ही जरूरी नहीं होता हैं, बल्कि स्मार्ट रिस्क लेना भी बहुत जरूरी होता है|

दोस्तों 2007 के वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ हुए बोल आउट में महेंद्र सिंह धोनी ठीक विकेट के पीछे खड़े थे| माही ने अपने तीनों बोलर जो कि हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग और रॉबिन उथप्पा थे, उन तीनों से कहा था कि आप विकेट को नहीं सिर्फ मुझे निशाना बनाइगा| उसके बाद जो कमाल हुआ तीनों की तीनों बॉल जाकर विकेट को हिट हुई और टीम इंडिया ने उस मैच को जीत लिया|

दोस्तों महेंद्र सिंह धोनी ने उस मैच में रॉबिन उथप्पा को बोलिंग देकर रिस्क तो लिया| लेकिन साथ ही में अपनी स्मार्टनेस से टीम इंडिया को वो मैच भी जिताया| इसलिए स्मार्ट रिस्क लेना भी बहुत जरूरी होता है|

3. आप हमेशा ताकतवर नहीं रह सकते इसलिए हमेशा बहादुर बन कर रहे-
जिंदगी में हमेशा याद रखना आप ताकतवर नहीं रह सकते, लेकिन आप हमेशा बहादुर रह सकते हैं और माही से यही सीखने को मिलता है| एम. एस. धोनी ( द:अन्टोल्ड स्टोरी) मूवी में हमने देखा कि किस तरीके से उनके पास सरकारी नौकरी आ चुकी थी, उनकी फॅमिली खुश हो चुकी थी|

लेकिन वो खुश नहीं थे, उन्हें अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आना था और अपने सपने को पूरा करना था| बिना किसी डर के वो आगे बढ़े और कमाल कर दिया| एम एस धोनी जब ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कप्तान थे, तब उन्होंने बीसीसीआई के सिलेक्शन कमेटी को बोला था कि सीनियर खिलाड़ियों को बाहर कीजिए और यंगस्टर्स को मौका दीजिए| 2011 के वर्ल्ड कप में हमें यंगस्टर्स की ही जरूरत है|

सिलेक्शन कमेटी ने उनकी बात सुनी, लेकिन सोचिए अगर वो उनकी बात नहीं सुनते तो हो सकता था कि माही को कप्तानी से हटा दिया जाता| शायद ये बात उनके भी दिमाग में रहीं होगी, लेकिन वो अपनी बात उनके सामने रखने से पीछे नहीं हटे और डरे नहीं| जिंदगी में डर को पीछे करना सबसे बड़ी जीत होती है|

4. लाइफ में हमेशा लीडर बने बॉस नहीं-
अब बात आती है, धोनी की उस क्वालिटी की जिसके बारे में पूरी दुनिया जानती हैं कि वो एक लीडर है, बॉस नहीं है| बचपन से हम सुनते आए हैं कि हमेशा लीडर बनो, बॉस मत बनो| लेकिन दिक्कत यह है कि सीख नहीं पाते| मोनू सिंह नाम के एक झारखंड के खिलाड़ी है| जिन्होंने आईपीएल एक पूरे सीजन में एक भी मैच नहीं खेला था| लेकिन जब चेन्नई ने आईपीएल ट्रॉफी जीती, तो मोनू सिंह के हाथ में वो ट्रॉफी थी|

महेंद्र सिंह धोनी कहीं पिक्चर में पीछे छुपे हुए थे, उस पिक्चर को जूम करने पर पता चला कि महेंद्र सिंह धोनी भी उस पिक्चर में हैं और सिर्फ उस सीजन की बात नहीं है| अक्सर यह होता है कि जब भी टीम ट्रॉफी जीतती है, तो धोनी एक साइड हो जाते हैं| जब उनसे इसके बारे में पूछा गया कि आप ऐसा क्यों करते हैं| तो बकायदा उन्होंने एक बात कही थी,

जिसे हम नीचे लिख कर बता रहे हैं-

वो बोलते हैं कि आप 15 सेकंड्स तक जाकर के वहाँ पिक्चर क्लिक करा लेते हैं, तो उसके बाद मिन आपको ट्रॉफी छोड़ देनी चाहिए| क्योंकि वैसे भी गेम आपने नहीं बल्कि ग्यारह लोगों की टीम ने जीता है|

एक और छोटा सा उदाहरण है, दोस्तों कि उनके होटल का कमरा हमेशा सभी खिलाड़ियों के लिए खुला रहता है| बेझिझक कोई भी अंदर आ सकता है, उनसे बात कर सकता है| आशिष नेहरा ने एक कमाल की बात बताई कि माही के रूम का दरवाजा हमेशा खुला रहता था| उसके रूम में सच करने की अनुमति थी|

आप जाकर के कॉल करके कुछ भी ऑर्डर कर सकते हैं| उसका बिल जो हैं, वो माही के नाम पर आ जाएगी| उसके लिए घबराने की कोई बात नहीं थी | लेकिन एक चीज जिसको करने की अनुमति माही के रूम में नहीं थी, वो थी गपशप या गप्पे लड़ाना| धोनी को पीठ पीछे किसी की बुराई सुनना पसंद नहीं है और यही बात उन्हें बॉस नहीं लीडर बनाती है|

5. हमें लाइफ में हमेशा सीखते रहना चाहिए-

लाइफ में हमेशा सीखते रहिए, माही से बढ़िया यह बात कोई नहीं सीखा सकता| उन्होंने अपने दोस्त से सीखा था कि हेलिकाप्टर शॉट क्या होता है, कैसा होता है और किस तरीके से खेला जाता है?
1983 के बाद 2011 में टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप जीता| तो वो वहीं शॉट था, जिसने टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताया था|

जिस सीट पर जाकर के बॉल गिरी थी| दोस्तों उसके बारे में बताया जा रहा है कि वानखेड़े स्टेडियम में वो जो सीट हैं| वी सीट माही के लिए रिजर्व की जाएगी| सबसे कमाल की बात धोनी ने बताई की कैप्टन बनने के बाद भी उन्होंने एक कमाल की बात सीखी| वो यह थी कि कॉमन सेन्स नाम कोई चीज नहीं होती| कई बार आपको लोगों की बताना पड़ता है कि आप गलत कर रहे हैं| अगर आप टीम को एड्रेस कर रहे हैं, तो पूरी टीम को बताइए| पार्टिकूलर्ली उस प्लेयर को मत बताइए क्योंकि उस प्लेयर को बुरा लग सकता है|

तो आप ऐसे कोशिश कीजिए कि आपकी बात अप्रत्यक्ष (Indirectly) उसे पता चल जाए| कॉमन सेन्स नाम कोई चीज नहीं होतीं हैं| कई बार आपको साफ-साफ बात रखनी पड़ती है, ताकि सामने वाले को आपकी बात समझ में आ जाए|
धोनी अपनी जिंदगी भर में सीखते आए और सीखते रहेंगे| इनकी यही बात इन्हें महान बनाती है|

6. हमें अपने जिंदगी में सब कुछ पहले ही सोच लेना चाहिए-

दोस्तों जिंदगी में सबसे बड़ा होता है सोच का चमत्कार| सुरेश रैना ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि माही कभी भी टीम मीटिंग दो या तीन मिनट से ज्यादा नहीं लेते हैं| यहाँ तक कि आईपीएल फाइनल से पहले भी वो टीम को बुलाकर के ज्यादा कुछ बताते नहीं है| बिल्कुल उनके ऊपर अनावश्यक दबाव नहीं डालते हैं| वो आसान से शब्दों में कहते हैं कि कल का मैच बहुत ही महत्वपूर्ण है, उसे खेलना है और जीतना है|

लेकिन माही अपने दिमाग में पूरे मैच को सोच लेते हैं| उन्हें मालूम होता है कि फील्ड किस तरह से सजानी हैं| कौन से गेंदबाज से कौन सा ओवर डलवाना हैं| सारी चीजें उनके माइंड में होती है और एक तरीके से वो पूरा मैच अपने माइंड में खेल चुके होते हैं| वो बस मैदान पर जाकर उन बातों को अपनी रणनीति को लागू करते हैं| इसलिए लाइफ में हमेशा यह याद रखना कि सोच का चमत्कार आपकी लाइफ बदल सकता है|

7. जिंदगी में चाहे कितने बड़े क्यों ना बन जाओ, लेकिन अपनी पहचान ना भूले-

दोस्तों हम अब बात करेंगे जर्सी नंबर सात की सातवीं लर्निंग की कि लाइफ में हमेशा आम बने रहना| किसी ने बड़े ही कमाल की बात कही हैं कि आसमान में उड़ने वाले पंछी को भी मालूम होता है कि आसमान में बैठने की जगह नहीं होती है| माही आम थे, आम हैं और आम ही रहेंगे| यहीं बात उन्हें सबसे ज्यादा खास और अलग अलग बनाती है|

महेंद्र सिंह धोनी ने जिस तरीके से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा, वो तरीका हर किसी को छू गया| फोन में बनाया गया एक छोटा सा वीडियो, एक IGTV की पोस्ट आती है| जिसमें बहुत सारी पिक्चर हैं, उसमे एक पिक्चर यह भी शामिल है, जिसमें माही का पोस्टर जलाया जा रहा होता है| माही ने उस छोटे से पोस्ट के जरिए यह बताने की कोशिश की कि मैं आप ही में से एक हूँ| बस आप ही के प्यार ने मुझे महेंद्र सिंह धोनी, द महेंद्र सिंह धोनी बनाया है|

वो जो पोस्ट है, उसमें एक गाना प्ले हो रहा हैं और उस फिल्म का नाम हैं “कभी-कभी”| साहिल लुधियानवी का लिखा हुआ और मुकेश जी की आवाज हैं, “मैं पल दो पल का शायर हूँ| माही आप पल दो पल के शायर नहीं है, आप तो बर्फ में जल्दी हुई फायर है|

आप सभी को मैं केवल यही कहना चाहता हूँ कि जिंदगी में हमेशा फॅमिली का प्यार, अपना विश्वास, अपनी मेहनत साथ रखना और ऊपर वाले पर विश्वास रखना| फिर महेन्द्र सिंह धोनी की तरह आप भी जिंदगी में कर दिखाओगे कुछ ऐसा की दुनिया बनना चाहेगी आपके जैसा और जाते-जाते बात जर्सी नंबर सात की कि समुंदर सात हैं, महाद्वीप सात हैं, रश्में सात हैं, कसमें सात हैं, यहाँ तक कि फेरे भी सात हैं| क्योंकि सात का मतलब हैं ट्रस्ट| माही जब खेलने आते थे, तो सभी को ट्रस्ट रहता था कि हम हारेंगे नहीं|

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