मी टू आन्दोलन| Me Too Movement Campaign in Hindi.

 

#Me Too Movement || #Me Too Campaign ||Hindi Article

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Me  too का मतलब हैं – “मैं भी” या ‘मेरे साथ  भी “| यह 25 सितम्बर के बाद से यौन उत्पीड़न की शिकार हुई ढेर सारी महिलाएँ सोशल मीडिया पर हैशटैग # me too  के साथ अपनी कहानियां बयां कर रही हैं |एक तरह से देखा जाएँ तो me too पीड़ित महिलाओं के लिए बहुत ही अच्छा काम कर रहा हैं और उनकी सहायता कर रहा हैं |

Me too movement  क्या हैं ये आंदोलन

Me too का आंदोलन हैं कि महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को इंसाफ़ मिले , जिससे हर महिला अपने दर्द को बता सके और सभी उसका समर्थन करे | कुछ महिलाएं डर और शर्म के कारण चुप रहती हैं और अपने हक के लिए आवाज उठाने में हिचकिचातीं हैं, उन्हें ये डर रहता हैं कि उनके परिवार की बहुत बदनामी होगी ,उनका कैरियर ख़राब हो जायेगा इसीलिए भी वह चुप रहती हैं | Me too बनाया गया है उन  महिलाओं पर होने वाले यौन  उत्पीड़न , शोषण और बलात्कार के खिलाफ आंदोलन हैं , जिसमे महिलाएँ # me too के साथ अपनी कहानियां बता रही हैं | वे बता रही हैं कि  उनकी जिंदगी में कब किसी प्रभावशाली या उनके करीबी शख्स ने उनका यौन उत्पीडन किया | # me too  के साथ महिलाएं ताजा मामलों से दर्शकों पुराने मामले सामने ला रही हैं कि  किस तरह उन्हें प्रभाव या शारीरिक ताकत से मजबूर करके उनका यौन उत्पीड़न किया गया |वे चुप रही , लेकिन अब उनके पास सोशल मीडिया पर आवाज उठाने  का मौका हैं , तो वे अपनी कहानियां और चेहरों के साथ सामने आ रही हैं | # me too  के साथ उन महिलाओं की कहानियां सबसे ज्यादा सामने आ रही हैं ,जिनका वर्क प्लेस पर यौन  उत्पीड़न किया गया |

Me Too Movement का इतिहास

2006 में me too movement की शुरुआत हॉलीवुड से हुई थी , इसकी शुरुआत अमेरिका सिविल राइट्स एक्टिविस्ट  तराना बर्क ने की थी , लेकिन यह me too कथन बीते साल 2017 अक्टूबर में बहुत प्रसिद्ध हुआ था | जब अमेरिका एक्ट्रेस ”एलिसा मिलानो”  ने ट्विटर पर लिखा कि उन महिलाओं को अपने साथ हुई यौन उत्पीड़न के खिलाफ खुल कर आवाज उठानी  चाहिए , मैं उनको सुझाव दूंगी कि me too शब्द का प्रयोग करें , ताकि हर किसी का ध्यान इसकी तरफ जाएँ | इस आंदोलन ने 2017 अक्टूबर में हॉलीवुड में जोर पकड़ा और हॉलीवुड के सबसे बड़े प्रोडूसर “हार्वी  विस्टीन “ के खिलाफ 20 से ज्यादा एक्ट्रेस सामने आई , इन सब ने बताया कि जब उन्होंने हार्वी के साथ काम किया था , तब हार्वी ने उन सब महिलाओ के साथ उत्पीड़न किया था | इसके बाद एक बाद हॉलीवुड के कई बड़े नाम यौन  शोषण के रूप में सामने आएं इसमें केविन स्पेसी जैसे एक्टर का नाम भी शामिल हैं |

 

भारत में me too movement

हॉलीवुड के बाद me too movement कई देशों  तक पहुँचा था , भारत में कई साल पहले भी महिलाओं ने me too movement  के साथ अपने साथ हुई घटनाओं को बताया था | लेकिन उस समय इस पर कोई बात-विबाद नहीं हुआ, जिसके कारण ये उस समय शांत हो गया था | अक्टूबर 2017 में जब अमेरिका में me too आंदोलन चला तो इसका थोड़ा सा असर भारत में भी देखने  को मिला | कई महिलाओं ने बताया कि कैसे कि उनके वर्क प्लेस पर उनका उत्पीड़न किया गया | लेकिन देखा जाये तो भारत में सही रूप  से me too 25 सितम्बर से शुरू हुआ | जब बॉलीवुड एक्ट्रेस  “तनुश्री दत्ता , ने एक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया | बताया जा रहा है कि  साल 2008 में फिल्म “ हॉर्न ओके प्लीज “ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उनका यौन उत्पीड़न किया था |  तभी से me too movement जोर पकड़ रहा हैं और आज बॉलीवुड में इस आंदोलन की शुरुआत का श्रेय तनुश्री को जाता हैं |

Me too movement से जुड़ी हाल ही की घटना

भारत में चल रहें  # me too कैंपेन के तहत अपने ऊपर लगे सेक्सुअल हैराशमेंट (यौन  उत्पीडन ) के आरोपों के बाद एम जे अकबर ने अपने पद से बुधवार को इस्तीफा दे दिया | हालांकि एम जे  अकबर ने यह इस्तीफा आरोप लगने के तुरंत बाद नहीं दिया हैं , बल्कि पहले तो उन्होंने अपने ऊपर लगें आरोपों के खिलाफ पत्रकार रमानी पर मानहानि  का मुकदमा किया , उसके बाद उन्होंने बात को आगे बढ़ते देखा तो उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया | यहीं वजह हैं कि गुरुवार को दिल्ली की पटिलाया हाउस कोर्ट में पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ एम जे अकबर के आपराधिक मानहानि मामले पर सुनवाई होगी , रमानी  ने अकबर पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं | अभी इस पर सुनवाई होना बाकि है और इसकी जाँच पड़ताल सही डंग से हो रही हैं |

Me too movement  के पक्ष

# me  too उन महिलाओं के पक्ष में काम कर रहा हैं , जो अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों को सह रही हैं और उनके प्रति आवाज नहीं उठाती हैं  उनको लगता हैं कोई उनके साथ खड़ा नहीं रहेगा | अगर उन्होंने आवाज उठायी भी तो उसमे उनकी ही बदनामी होगी जिस कारण भी वह चुप रहती हैं | इसमें गलती उन महिलाओं की नहीं हैं बल्कि हमारे देश में रह रहे कुछ बेवकूफ लोगों की भी हैं जो सोचते है लड़की के साथ कुछ हुआ है तो उनके व्यवहार और उनकी हरकतों के कारण ही  हुआ हैं | लड़की अगर किसी से हस के बात करेगी तो उसका गलत मतलब निकाल देना , ये देश के लोगों की सोच हैं , जिस कारण भी कई महिलाएं चुप रहती हैं और इस भयंकर जुर्म को सहती हैं | लेकिन आज जब me too  ने इसकी पहल की और तनुश्री और उनकी जैसी महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न मामलो को खुलकर सामने रखा , तो कई लोग इनके साथ हैं उनके पक्ष में अपनी अपनी बात रख रहें है | और उनको सलाम भी कर रहें हैं |

Me too movement के विपक्ष  

# me too  movement अच्छा काम रहा हैं लेकिन कुछ बहुत से लोग हैं जो इसके विपक्ष में भी हैं  बॉलीवुड में इतने बड़े बड़े कलाकारों पर इल्जाम लगाए गए हैं जिसपर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हैं , पर सबका मानना हैं यह है कि जिन- जिन के ऊपर इल्जाम लगाया गया हैं उनके खिलाफ सबूत होना बहुत जरूरी  हैं क्यूंकि किसीके भी बारे में कुछ भी कहना बहुत गलत हैं क्यूंकि कोई भी इस me too का गलत फायदा उठा सकता हैं कल जिसकी वो गर्लफ्रेंड होगी और आज नहीं है अगर जानबूझकर किसी को फ़साना चाहती हो  या फिर वो किसी से अपना बदला लेना चाहती हो , हम कुछ भी नहीं कह सकते हैं कब किस लड़की के मन में क्या चल रहा हैं | इसीलिए me too को सही महिलाओं का ही साथ देना चाहिए |

 

 


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5 thoughts on “मी टू आन्दोलन| Me Too Movement Campaign in Hindi.”

  1. Dear Sanjana,
    I would like to appreciate your efforts, dedication and interest to promote awareness among the people through the means of writing blogs, contents etc..

    Very nice work….keep it up

  2. पोस्ट पढ़ कर अच्छा लगा संजना जी.
    लेकिन क्या आपको नहीं लगता की जो बॉलीवुड पूरी तरह से समाज के लिए एक झूठ का नकाब है उसके द्वारा ऐसी बाते फैलाई जाने पर हम इसे सच मान ले. हर बात के 2 पहलू होते है. और जरुरी नहीं की 100 out of 100 केस सही हो. ये भी तो हो सकता है की तनुश्री को आज बॉलीवुड पूछता ही नहीं है और किसी से दुश्मनी या नाम ख़राब करने के लिए इसका सहारा लिया जा रहा हो.
    अगर कल को राखी सावंत कह देगी की उसका भी शौषण हुआ है तो क्या हम मान लेंगे? समाज के लिए जो जैसा है उसे वैसा ही मिलता है. मै इसके खिलाफ नहीं हूँ लेकिन सालो बाद इस तरह की घटना को शेयर करना अजीब लगता है. ध्यान दे तो पाएंगे की इनमे ही कुछ केस फ्रॉड और गलत मिले है लेकिन उनकी वजह से नाम तो ख़राब हुआ है.
    dont mind लेकिन हर बात को अच्छे से हर पहलू के साथ शेयर करना चाहिए. आपने #meetoo पर अच्छा लिखा है लेकिन बेहतर होता अगर आप इसमें ही जो फ्रॉड केस हुए है उन पर भी लिखते

    1. thank yu sir for your advice nd me kosis krungi ki apko frod logo ke bare mein bhi par btaun aapni ke through. jisse hr kisi ko such or jhut ka pta lag sake…..or #meetoo movement ka log only shi kam ke liye use kre to jada achha hoga…jaruri nhi hain ki hr aaurat shi ho…par jaruri ye bhi nh hain ki har aaurat galt hi ho…
      to depend insaan ki soch par krta hain ki hm kese usko treat krte hain.
      thank yu

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