बन्दर से सीखे सफलता का रहस्य| Success Formula from Monkey’s Story in Hindi.

बन्दर से सीखे सफलता का रहस्य| Success Formula from Monkey in Hindi.

Inspirational Success Formula from Monkey Story in Hindi.
प्रेरणादायक कहानी, बन्दर से सीखे सफलता का रहस्य|


बन्दर से सीखे सफलता का रहस्य| Success Formula from Monkey in Hindi.
बन्दर से सीखे सफलता का रहस्य| Success Formula from Monkey in Hindi.

ज़िन्दगी में सफलता पाने का सिर्फ एक ही रास्ता होता हैं, जिसे हम कठिन परिश्रम कहते हैं| बिना परिश्रम के आप कितने भी तरीके अपना ले, आपका वह प्रयत्न बेकार ही जायेगा| 

हमारे जीवन में हमें बहुत से लोग ऐसे मिलते हैं, जो बिना परिश्रम के कुछ आसान तरीके से पैसे कमाने की सोच रखते हैं लेकिन उनके यह सारे प्रयत्न बेकार हैं क्योंकि एक ना एक दिन उसे उस आसान तरीके को अपनाने के कारण पछताना पड़ता हैं|

क्योंकि किसी ने यह सही कहा हैं कि परिश्रम के बिना कुछ भी सफल नहीं हो सकता हैं| तो आइये दोस्तों ऐसी ही परिश्रम के ऊपर लिखी एक छोटी सी Motivational Story बन्दर से सीखे सफलता का रहस्य| Success Formula from Monkey Story in Hindi को पढ़ते हैं और परिश्रम की ओर अपने आप को जागरूक करते हैं|

एक बार एक व्यक्ति शहर से गाँव में आता हैं और उन्हें कुछ स्कीम के बारे में बताता हैं| उस गाँव में बहुत सारे बन्दर थे| उस आदमी ने उन लोगों को स्कीम के बारे बताया| स्कीम यह थी कि उस आदमी ने कहा कि अगर तुम लोग मुझे एक  बंदर लाकर दोगे तो मैं तुम्हें 200 रुपये दूँगा|

गाँव वालें सब खेती में लगे हुए थे परन्तु जब उन्होंने इस स्कीम के बारे में सुना तो उन्होंने  बंदर को पकड़ कर पैसे कमाने की सोची| अब गाँव के लोग बंदर पकड़ने में लग गए और उस व्यापारी के पास जाकर बंदर  देने लगे| अब हर रोज कोई 10, कोई 12 और कोई 15 बंदर पकड़ने लगे| मिला-जुलाकर एक प्रकार का उनका यह व्यापार बन गया| 

लोग बंदर पकड़ कर लाते और वो व्यापारी उसे हर  बंदर पर 200 रूपये देता और उन बंदर को अपने पास रख लेता| गाँव के उन लोगों ने कभी यह सोचा नहीं कि वह व्यापारी इतनी सारी  बंदर का क्या करेगा| इसके बाद यह परिणाम हुआ कि गाँव में धीरे-धीरे बंदर ख़त्म हो गए| 

अब उस व्यापारी को भी लगने लगा की गाँव में बंदर ख़त्म हो रहे  हैं और बंदर लाने वालों की संख्या भी कम होने लगी| कुछ लोगों ने यह काम भी छोड़ दिया और अपने खेतों में फिर से परिश्रम करके कमाने की सोची| 

अब उस व्यापारी ने अपनी दूसरी स्कीम रखी और अपनी अगली चाल चली| उसने इस बार लोगों से कहा कि इस बार अगर तुम मुझे  बंदर लाकर दोगे तो, मैं तुम्हें 300 रुपये दूँगा| 

अब गाँव वाले दूसरे गाँव में जाने लगे और वहाँ से  बंदर लाकर उस व्यापारी को देने लगे| कुछ लोगों ने यह काम छोड़ दिया था और कुछ लोग यह काम कर रहे थे| उन लोगों को 300-300 रूपये मिलते रहे और वह दूर-दूर से बन्दर लाते रहे|

बन्दर लाते-लाते इन्होंने अपने आस-पास के सारे गाँव के भी बन्दर ख़त्म कर दिए| अब एक बार फिर उसने पैसे बढ़ा दिए,अब उसने कहा कि मैं तुम बंदर के बदले 500 रूपये दूँगा गाँव के सभी लोगों एक बैठक की और बात करने लगे की यह आदमी तो पैसे बढ़ाने पर लगा हैं|

लेकिन अब तो  बंदर भी ख़त्म होने लगे हैं| फिर सभी लोगों ने यह निर्णय लिया की हम सब यह काम अब नहीं करेंगे और फिर से पहले की तरह खेती-बाड़ी ही करेंगे| अब उस व्यापारी को भी लगा की अब कोई भी यह काम नहीं कर रहा हैं, तो फिर वह कुछ समय के लिए शहर वापस लौट गया|

 गाँव वाले सब फिर से पहले की तरह खेती-बाड़ी में लग गए और परिश्रम करने लगे| एक दिन फिर से वह व्यापारी आया और इस बार वह अपने साथ में एक आदमी को भी लेकर आया था|

उसने फिर से गाँव के लोगों को इकठ्ठा किया और कहा कि इस बार मैं आपके लिए फिर से एक नई स्कीम लाया हूँ| 

अगर आप हमें इस बार फिर से  बंदर पकड़कर दोगे तो मैं तुम्हें पहले से दो गुना मतलब एक हज़ार रूपये दूंगा| गाँव वालों को लगा की यह आदमी हमें पागल बना रहा हैं, यह सब फ़ालतू की बातें हैं| 

आप लोग अपनी खेती-बाड़ी करते रहो| गाँव के मुखिया ने भी गाँव के लोगों समझाया| लेकिन कुछ लोगों ने कहा की नहीं साहब इस शहर वाले की बातों में कुछ दम दिखाई देता हैं| 

यह जो व्यापारी था वो रात के समय गाँव से चला गया लेकिन उसके साथ में जो आदमी था उसे छोड़ गया| उसके साथ जो आदमी था उसने फिर से रात में एक बार गाँव में बैठक रखी और गाँव वालों से कहा कि देखो मेरे साहब तो चले गए हैं| 

अब गाँव में बंदर हैं नहीं यह हम सभी जानते हैं| आस-पास के गाँव में भी नहीं हैं,यह तुम भी जानते हो|

अब जो मेरी गाड़ी में बंदर हैं, तुम उसे मुझसे 500 रूपये में खरीद लो और फिर मेरे साहब को तुम यह सारे बंदर सुबह के समय उन्हें बेच देना,वो आप लोगों को बंदर  के 1000 रूपये दे देंगे|

गाँव वाले पूरी रात इसी के बारे में सोचते रहे और फिर उन्होंने यह निर्णय लिया कि हम इस आदमी पर एक बार भरोसा कर लेते हैं| सारे गाँव के लोगों ने जितना भी पैसा खेती-बाड़ी करके इकठ्ठा किया था| वो सारा का सारा पैसा उनहोंने उस आदमी को दे दिया| 

उस आदमी ने  बंदर को पिंजरे से निकाला और उन गाँव के लोगों ने उसे पाँच-पाँच सौ रूपये दे दिए और फिर रात मैं वो आदमी फिर से शहर निकल गया| अब इस गाँव में सिर्फ  बंदर ही बंदर हैं और कुछ लोग हैं जिनके पास पैसा नहीं हैं| 

यह छोटी सी मजेदार कहानी हमें यह बात सिखाती हैं कि ज़िन्दगी में कभी भी शॉर्टकट का कोई रास्ता नहीं होता हैं| हम से बहुत सारे लोग कई सारी स्कीम के चक्कर में,दोस्तों के चक्कर में अपने करियर को बर्बाद कर देते हैं| 

इसलिए यह याद रखिये कि कठिन परिश्रम ही सफलता का सही रास्ता हैं, इसके अलावा कुछ नहीं| इसलिए मेहनत कीजिए और सफलता पाइये|

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Sanjana

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