अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एम्बुलेंस में हुई गर्भवती महिला की मौत| Pregnant Lady Death Irresponsibility of Hospital in Hindi.

अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एम्बुलेंस में हुई गर्भवती महिला की मौत Pregnant Lady Death Irresponsibility of Hospital in Hindi.
अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एम्बुलेंस में हुई गर्भवती महिला की मौत Pregnant Lady Death Irresponsibility of Hospital in Hindi.
अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एम्बुलेंस में हुई गर्भवती महिला की मौत Pregnant Lady Death Irresponsibility of Hospital in Hindi.

नोएडा से शर्मसार करने वाला मामला सामने आया हैं| एक गर्भवती महिला के साथ उसके बच्चे की मौत एंबुलेंस में ही हो गई| महिला ने इलाज के अभाव में एंबुलेंस में दम तोड़ दिया| वह बेचारी और उसके परिवार के सदस्य केवल इस आशा में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकते रहे कि वह जल्द ही भर्ती  हो जाए|

लेकिन किसी भी अस्पताल ने उस महिला को अपने अस्पताल में इलाज करने से मना कर दिया|

दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल इसी विषय पर हैं| तो आइए दोस्तों उस महिला को न्याय दिलाने के लिए हमारे इस आर्टिकल को पढ़ते हैं- अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एम्बुलेंस में हुई गर्भवती महिला की मौत| Pregnant Lady Death Irresponsibility of Hospital in Hindi.

गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी नीलम कुमारी 8 महीने की गर्भवती थी-

गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी नीलम कुमारी 8 महीने की गर्भवती थी| दर्द उठने के बाद उसे शुक्रवार की सुबह 6 बजे उसे ऑटो से एक अस्पताल ले जाया गया|

नीलम के पति के भाई शैलेंद्र कुमार ऑटो ड्राइवर हैं| शैलेंद्र और उनकी पत्नी सुषमा अपने ऑटो से नीलम को लेकर नोएडा के सेक्टर 24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल लेकर गए|

नोएडा के करीब 6 अस्पतालों ने भर्ती करने के लिए मना किया-

मृतक महिला के परिवार के सदस्यों का कहना हैं कि  वे महिला को नोएडा के करीब 6 अस्पतालों में लेकर  गए, लेकिन किसी ने भी उनकी हालत देखकर उस महिला को भर्ती करना जरूरी नहीं समझा| महिला की तबियत बिगड़ती रही और अंत में उस गर्भवती महिला ने दम तोड़ दिया|

वे 8 महीने की गर्भवती थीं| हादसे में पेट में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई|

डॉक्टरों ने क्या-क्या बोल कर उन्हें हॉस्पिटल से भगा दिया-

1. ईएसआईसी अस्पताल में कुछ देर तक नीलम को आक्सीजन दी गयी, लेकिन उसके बाद उन्होंने इलाज की सुविधा न होने का बहाना मारकर| नीलम के परिजनों को बोला कि इन्हें जिला अस्पताल लेकर जाओ| वहीं अस्पताल में डॉक्टर या अन्य किसी स्टाफ ने नीलम को  एक बार  देखा तक नहीं|

2. इसके बाद नीलम के पति और उसके जेठ उसको लेकर फोर्टिस हॉस्पिटल पहुंचे| वहीं फोर्टिस हॉस्पिटल वालों ने यह कहकर इलाज करने से मना कर दिया कि यहां का खर्चा बहुत ज्यादा आएगा| लगभग 6, 7 लाख से ज्यादा खर्चा होगा आप लोग पैसा दे नहीं पाओगे और फिर झगड़ा करोगे| नीलम के परिजनों ने  बहुत विनती की फिर भी वहां किसी डॉक्टर ने उसका इलाज नहीं किया|

3. इसके बाद वह शारदा अस्पताल और जिम्स अस्पताल ले गए, लेकिन वहां भी किसी ने नीलम को भर्ती नहीं किया| वही शारदा अस्पताल में डॉक्टरों का कहना था कि आप सभी को पहले कोविड-19 का टेस्ट कराना होगा| नीलम के परिवारजन टेस्ट कराने को भी मान गए थे, फिर भी उन्हें जिम्स अस्पताल रेफर कर दिया गया|

अब नीलम की तबियत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी थी| 108 नंबर पर कॉल करके एम्बुलेंस बुलाई गयी, लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिली| उसके बाद नीलम के परिजनों ने एक प्राइवेट एम्बुलेंस बुलाई और उसके ऑक्सीजन सपोर्ट पर जिम्स अस्पताल लेकर गए| लेकिन वहां खाली बेड नहीं मिले|

4. इसके बाद नीलम को मैक्स अस्पताल ले गए, लेकिन वहां भी उसका इलाज नहीं किया गया और उन्हें जिम्स  रेफर कर दिया गया|

5. इसके बाद फिर से नीलम के परिजनों उसको लेकर जिम्स अस्पताल जा ही रहे थे कि रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो गयी|

किन-किन अस्पतालों में एम्बुलेंस ने लगाए चक्कर-

सुबह 6 बजे – ईएसआईसी हॉस्पिटल, सेक्टर 24

सुबह 9 बजे – जिला अस्पताल, सेक्टर 30

सुबह 10 बजे – शिवालिक हॉस्पिटल, सेक्टर 51

दोपहर 11 बजे – फोर्टिस हॉस्पिटल, सेक्टर 62

दोपहर 1: 30 बजे – जेपी हॉस्पिटल, सेक्टर 128

दोपहर 2:30 बजे – शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा

दोपहर 3:30 बजे – जिम्स, ग्रेटर नोएडा

शाम 5:30 बजे – मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली

शाम 7 बजे – दोबारा जिम्स पहुंचे

अस्पताल दर अस्पताल धक्के खाते रहे परिवार के सदस्य-

परिवार वाले बीमार महिला को लेकर सुबह ही एंबुलेंस से निकले, लेकिन उन्हें कोई अस्पताल भर्ती करने को तैयार नहीं था|परिवार को अस्पताल दर अस्पताल जिरह करते हुए सुबह से शाम का समय बीत गया| इसी बीच बीमार महिला की तबियत और बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई|

मामले की जाँच करने के विषय में कहा जिलाधिकारी ने-

जिलाधिकारी सुहास एल वाई के द्वारा इस पूरे प्रकरण की जांच अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मुनींद्र नाथ उपाध्याय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दीपक अहोरी को सौंपी गई है| जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों को इस प्रकरण में तत्काल जांच करते हुए कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं|

ट्वीटर पर अखिलेश यादव ने इसके प्रति आलोचना की-

उत्तर प्रदेश में प्रसव के लिए अस्पताल खोजते-खोजते एक गर्भवती महिला की मृत्यु अति दुखद है| सरकार यह बताए कि अगर वो कोरोना के लिए 1 लाख बेड के इंतजाम का दावा करती हैं, तो आनेवाली पीढ़ियों के लिए कुछ बेड आरक्षित क्यों नहीं रखे| भाजपा सरकार ये भी बताए कि उसने अब तक कितने अस्पताल बनाए हैं|

गर्भवती महिला के साथ हुए अन्याय के लिए परिवार के सदस्य मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे-

उम्मीद साथ छोड़ने लगी थी लेकिन फिर भी परिवार नीलम को लेकर गाजियाबाद वैशाली स्थित मैक्स अस्पताल लेकर गया|लेकिन वहां भी भर्ती करने से मना कर दिया गया| वे दोबारा जिम्स लेकर गए लेकिन जैसे ही वे वहां पहुंचे नीलम की ऐंबुलेंस में ही मौत हो गई|

शैलेंद्र ने कहा, ‘जब उसने कोई रिस्पॉन्स नहीं किया तो हमने स्टाफ से चेक करने को कहा लेकिन साढ़े 7 बजे उसे मृत घोषित किया गया| ‘शैलेंद्र ने कहा, ‘जो हमारे परिवार के साथ हुआ, वह किसी और के साथ न हो| हम मुख्यमंत्री को इस बारे में पत्र लिखेंगे|’

दोस्तों नीलम एक लोकल फैमिली की थी| वह एक ऐसे कॉलोनी से आती हैं जो कन्टेन्टमेंट जोन में हैं| इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं था कि वह भी कोरोना से संक्रमित थी, इस वजह से उसका इलाज नहीं किया गया और उसका परिणाम यह हुआ कि उसकी मृत्यु हो गयी|

लेकिन अब हम सभी का फर्ज बनता हैं कि हम एक नीलम जैसी किसी भी पीड़ित स्त्री या जिसे डॉक्टर की मदद हो, उसके साथ ऐसा व्यवहार ना होने दे| इसलिए डॉक्टरों से अनुरोध हैं कि आपको भगवान दर्जा दिया गया हैं तो ऐसी कोई भी गलती ना कीजिए जिससे लोगों का डॉक्टरों पर से भरोसा उठ जाए|

दोस्तों, ‘आपको हमारा यह आर्टिकल यह अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एम्बुलेंस में हुई गर्भवती महिला की मौत| Pregnant Lady Death Irresponsibility of Hospital in Hindi. आप हमें कमेंट करके बताए और हमारे इस आर्टिकल को शेयर और लाइक करना ना भूले|

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