क्या इस दवा से कोरोना ठीक हो सकता हैं? Coronavirus Disease Treatment Remdesivir.

क्या इस दवा से कोरोना ठीक हो सकता हैं Coronavirus Disease Treatment Remdesivir
क्या इस दवा से कोरोना ठीक हो सकता हैं Coronavirus Disease Treatment Remdesivir
क्या इस दवा से कोरोना ठीक हो सकता हैं Coronavirus Disease Treatment Remdesivir.

अमेरिका ने कोरोना वायरस महामारी के उपचार के लिए रेमडेसिवियर दवा पर विश्वास जताते हुए कहा कि इस बात के “स्पष्ट” सबूत मिले हैं कि यह दवा कोरोना वायरस के मरीजों को ठीक कर सकती हैं| इस दवा के क्लिनिकल ट्रायल में यह बात सामने आई हैं कि दवा के प्रयोग से मरीजों में लक्षण 15 दिनों की जगह 11 दिनों के अंदर दिखने लग जाते हैं| दोस्तों, हमारा आज का आर्टिकल इसी विषय पर हैं| तो आइए दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं-क्या इस दवा से कोरोना ठीक हो सकता हैं? Coronavirus Disease Treatment Remdesivir.

इस दवा से क्या फायदे होंगे-

हालांकि, अब तक इस दवा पर हुई जाँच को लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई हैं| लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर इस दवा से जुड़े दावों की पुष्टि होती हैं| तो, यह मौजूदा दौर की बेहतरीन खबर होगी| लेकिन उन्होंने यह भी कहा हैं कि यह दवा इस बीमारी के लिए जादुई पुड़िया की तरह नहीं हैं| इस दवा से जान बचाने की क्षमता विकसित होगी, अस्पतालों पर बोझ कम किया जा सकेगा और कुछ जगहों पर लॉक डाउन हटाया जा सकेगा|

यह दवा ईबोला वायरस के लिए बनी थी-

दरअसल इस दवा को ईबोला के लिए विकसित किया गया था| यह एक एंटी-वायरल दवा हैं| कोई भी वायरस जब किसी व्यक्ति के शरीर में जाता हैं|  तो, वह अपने-आप को मजबूत करने के लिए अपनी दूसरी प्रतियों को तैयार करता हैं|  और यह इंसान के शरीर की कोशिकाओं में होता है| लेकिन इस प्रक्रिया में वायरस को एक एंजाइम की जरूरत हैं| यह दवा इसी एंजाइम पर हमला करके वायरस के लिए एक तरह का रोड़ा बनती हैं|

अमेरिका में इस दवा का ट्रायल कितने व्यक्तियों पर किया गया-

इस दवा का ट्रायल अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान में किया गया| इस ट्रायल में 1063 लोगों ने भाग लिया था| इनमें से कुछ मरीजों को यह ड्रग दिया गया| वहीं कुछ मरीजों को प्लेसिबो दी गयी और दवाओं की दुनिया में प्लेसिबो से आशय उस चीज से हैं| जिसमें कोई भी मेडिकल गुण नहीं होते हैं| इनमें पानी और शक्कर जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं|

ट्रायल से क्या-क्या आंकड़े सामने आए-

अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान के प्रमुख डॉक्टर एंथनी फाॅउची ने कहा हैं| कि ट्रायल के आंकड़े यह बताते हैं| कि यह दवा कोरोना वायरस से जूझ रहे मरीजों के ठीक होने में प्रभावी साबित हो रहीं हैं| उन्होंने कहा हैं कि दवा वायरस को ब्लॉक कर सकती हैं और यह बता रहीं हैं| कि अब हमारे पास वह रास्ता होगा कि हम मरीजों का इलाज कर सकेंगे|

इस दवा से मृत्यु दर कितनी हुई हैं-

हालांकि, इस दवा का कोरोना वायरस से होने वाली मौतों पर कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं पड़ा हैं| वो लोग, जिन्हें यह दवा दी गई, उनमें मृत्यु दर आठ फीसदी थी और वो लोग जिन्हें प्लेसिबो दी गयी, उनमें मृत्यु दर 11.06 फीसदी थी| लेकिन यह नतीजे सांक्षिकी आधार पर अहम नहीं हैं| इसका मतलब यह हुआ कि वैज्ञानिक इस बात में सक्षम नहीं हैं कि मृत्यु दर में जो अन्तर हैं, उसका आंकलन सही हैं कि नहीं हैं| यह भी साफ नहीं हुआ हैं कि किसे फायदा हो रहा हैं|

इस दवा के लिए क्या-क्या स्पष्ट होना जरूरी हैं-

क्या यह उन लोगों को और जल्दी ठीक करने में मदद कर रहा हैं| जो कि बिना दवा के भी ठीक हो रहे थे| दवा कम या ज्यादा किस उम्र के वर्ग में ज्यादा काम करती हैं| यह दवा उन लोगों को आईसीयू में जाने से बचा रहीं हैं| यह दवा युवाओं और वृद्धों के साथ बेहतर काम करती हैं| या फिर ये दवा बीमार या स्वस्थ व्यक्ति किस पर ज्यादा असर करती हैं| क्या मरीजों का शुरुआती स्तर पर ही ध्यान रखना होगा जब वायरस अपने चरम पर होता हैं|

इस दवा से लोगों की जान बचाई जा सकेगी-

जब इस दवा से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त की जाएगी| तब इस तरह के विशेष सवालों के जवाब सामने आएंगे| क्योंकि इस दवा से लोगों की जिंदगियाँ बचाने के साथ-साथ लॉक डाउन हटाने जैसे फायदे भी हो सकते हैं|

इस दवा के खिलाफ लंदन के यूसीएल कॉलेज के महेश परमार के क्या विचार हैं-

लंदन के यूसीएल कॉलेज में एमआरसी क्लिनिकल ट्रायल यूनिट के निदेशक प्रोफेसर महेश परमार कहते हैं| कि इस दवा के व्यापक ढंग से उपलब्ध होने से पहले कई चीजें स्पष्ट होना जरूरी हैं| इसके द्वारा मिले डेटा और नतीजों के नियामकों द्वारा समीक्षा की जानी जरूरी हैं| ताकि, इस ड्रग को लायसेंस दिया जा सके| इसके अलावा अलग-अलग देशों के स्वास्थ्य विभागों से भी आंकलन जरूरी होगा| जब यह सब हो रहा हैं| तब हमें इस ट्रायल और दूसरे ट्रायल से ज्यादा और दीर्घकालीन डेटा मिलेगा| जिससे यह तय किया जाएगा कि यह दवा कोरोना वायरस ड्रॉप के लिए हैं या नहीं हैं|

अगर इस दवा की पुष्टि की गई, तो यह बहुत कारगर होगा-

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर हार्वे इस समय काफी व्यापक स्तर पर कोरोना वायरस की दवा खोजने के लिए अभियान चला रहे हैं| उन्होंने बताया हैं कि हमें पूरे नतीजें देखने की जरूरत हैं| लेकिन अगर इस दवा पर किए गए दावों की पुष्टि की जाती हैं| तो यह बहुत बेहतरीन और कोरोना वायरस के खिलाफ चल रहीं लड़ाई के खिलाफ एक अच्छी खबर होगी| इसके बाद अगले कुछ कदमों में इससे जुड़ी जानकारियों को सांझा किया जाना हैं| और इस दवा को सभी के लिए उपलब्ध कराए जाना शामिल हैं|

चीन की इस दवा की रिपोर्ट में क्या कमी थी-

अमेरिका की ओर से इस दवा की जानकारी जब सामने आई, तभी चीन ने इसी दवा पर किए गए ट्रायल की रिपोर्ट लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुई हैं| जिसके मुताबिक यह दवा अप्रभावी साबित हुई हैं| हालांकि चीन में यह ट्रायल अधूरा रह गया था| क्योंकि  लॉक डाउन की सफलता के कारण चीन में मरीजों की संख्या कम हो गयी थी|

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बाबक जावेद इस दवा के बारे में क्या बताते हैं-

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बाबक जावेद कहते हैं|  कि यह आंकड़े काफी बेहतर हैं| लेकिन कोरोना वायरस के लिए कोई दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण, इस दवा को जल्द स्वीकृति दी जा सकती हैं| लेकिन यह नतीजें यह भी बताते हैं| कि रेमडेसिवियर कोई जादू की पुड़िया नहीं हैं|

इसके अलावा दूसरे दवाइयों में क्या-क्या प्रयोग किया जाता हैं-

ऐसे में इससे लोगों के ठीक होने में कुल फायदा 30 फीसदी तक हैं| इसके साथ ही कोरोना वायरस को लेकर जिन दूसरी दवाइयों की टेस्टिंग चल रहीं हैं| उनमें मलेरिया और एचआईवी के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाई भी शामिल हैं| इन दवाओं में वायरस पर हमला करने के साथ-साथ वो कंपाउंड होते हैं| जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को आराम देते हैं| हालांकि एंटी-वायरल शुरुआती चरणों में और इम्यून दवाएं बीमारी के बाद के चरणों में प्रयोग की जाती हैं|

दोस्तों, ‘आपको हमारा यह आर्टिकल क्या इस दवा से कोरोना ठीक हो सकता हैं? Coronavirus Disease Treatment Remdesivir. आप हमें कमेंट करके बताए और हमारे इस आर्टिकल को शेयर और लाइक करना ना भूले|

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Sanjana Singh

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