जानवरों,पक्षियों को खाना ही वायरस के पैदा होने का कारण हैं? Does eating animals, birds cause virus?

जानवरों,पक्षियों को खाना ही वायरस के पैदा होने का कारण हैं Does eating animals, birds cause virus
जानवरों,पक्षियों को खाना ही वायरस के पैदा होने का कारण हैं Does eating animals, birds cause virus
जानवरों,पक्षियों को खाना ही वायरस के पैदा होने का कारण हैं Does eating animals, birds cause virus.

सार्स महामारी और पश्चिमी अफ्रीका में फैले इबोला के वक्त भी ऐसा हुआ था, जो आज कोरोना वायरस की महामारी में हो रहा हैं| यह सभी वायरस जानवरों से इंसानों में पहुँचे और वैश्विक महामारी के उदाहरण हैं| दोस्तों हमें अब यह समझ लेना चाहिए कि हमें जानवरों को मारकर नहीं खाना चाहिए और ना ही इन्हें मारकर इनकी तस्करी करनी चाहिए| क्योंकि इन्हीं के जरिए कई वायरस जानवरों से इंसान में फैले हैं और वैश्विक महामारी का रूप ले चुके हैं| तो आइये दोस्तों हमारे आज के Article को पढ़ते हैं और भविष्य में ऐसी कोई महामारी उत्पन्न ना हो इसके लिए अभी से सचेत हो जाते हैं- जानवरों,पक्षियों को खाना ही वायरस के पैदा होने का कारण हैं? Does eating animals, birds cause virus?

क्रिस्टीन जॉनसन की जानवरों से इंसान तक पहुंचने वाले वायरस की स्टडी-

एक नई स्टडी के अनुसार इंसान ही विषाणुओं को जानवरों से इंसान तक ला रहे हैं| एक साइंस जनरल ‘प्रोसिडिंग्स ऑफ दी रियल सोसायटी बीः बायोलॉजिकल साइंसेज में हाल ही में इस सिलसिले में यह रिसर्च पेपर पब्लिश हुआ हैं| इस रिसर्च पेपर की लीड राइटर क्रिस्टीन जॉनसन हैं| वह यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वेटनरी स्कूल में रिसर्चर भी हैं|

क्रिस्टीन जॉनसन कहती हैं कि अगली महामारी का चुपचाप इन्तजार करने से पहले हमें जरूरी कदम उठाने होंगे| इंसान की गतिविधियों ने कई प्रजातियों को विलुप्त होने की कगार पर पहुँचा दिया हैं| इतना ही नहीं अब जानवरों की दुनिया की चीजें हमारी दुनिया में दाखिल हो रहीं हैं|

शिकार, तस्करी के कारण विलुप्त होने वाले जानवरों से ही विषाणु इंसान तक पहुँच रहा हैं-

क्रिस्टीन जॉनसन और उनके सहयोगियों ने ऐसे 142 मामलों को स्टडी किया हैं, जहाँ कोई बीमारी जानवरों से होते हुए इंसानों तक पहुँच गयी| क्रिस्टीन की टीम ने विलुप्त हो रहे जानवरों की रेड लिस्ट को भी देखा| इस रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण कन्कलूशन विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गए जानवरों से जुड़ा हुआ है|

यह वो जानवर नहीं हैं, जो किसी बीमारी या किसी गैर इंसानी गतिविधी की वजह से लुप्त होने की कगार पर पहुँचे| बल्कि यह वो जीव हैं, जो शिकार, तस्करी और नेचुरल हेबीटेट के खत्म होने की वजह से अपने अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं और यहीं इंसानों को विषाणुओं वाली बीमारी से हानि पहुँचा रहे हैं|

लुप्त होने वाली जानवरों की प्रजातियां दो तरह से संक्रमण फैला रहीं हैं-

क्रिस्टीन जॉनसन कहती हैं कि उनके पास जो डेटा हैं, वो बताता हैं कि लुप्त होने वाली प्रजातियों से वायरस का संक्रमण दो तरीके से हो रहा हैं| एक तरफ तो इंसान तस्करी और शिकार की वजह से जानवरों के संपर्क में आ रहा हैं| जानवरों के रक्त, मल-मूत्र या उनसे निकलने वाले अन्य चीजों के संपर्क  में आदमी आ रहा हैं और इससे इंसानो में संक्रमण का जोखिम बढ़ गया हैं| यह विषाणु कैसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर कैसे पहुँच रहे हैं?
ये जानवर बाजार में बेचे जा रहे हैं, लोग इन जानवरों को दूसरे जानवरों के साथ पकड़कर रख रहे हैं| इस माहौल में विषाणुओं का एक जानवर से दूसरे जानवर तक पहुंचना आसान हो गया हैं| अगर ये वन्य जीव अपने प्राकृतिक आवास में रहते, तो ऐसा कभी नहीं होता|

डेविड की जानवरों से इंसानों तक पहुंचने वाले वायरस की चेतावनी?

साल 2012 में प्रतिष्ठित अमरिकी साइंस रिपोर्टर डेविड क्वामैन ने अपनी एक किताब में इस बारे में चेतावनी दे दी थी| उन्होंने अपनी किताब में जानवरों से इंसानो तक पहुंचने वाली वायरस जनित महामारियों की बहुत लम्बी लिस्ट बतायी हैं|

महामारी के कुछ मुख्य उदाहरण-

ये महामारियां हैं, जैसे मार्बग जो 1967 में आयी, लासा जो 1969 में आयी, निपाह 1998 में आयी, HIV 1981 में आयी, हेंड्रा 1994 में, एविन इन्फलून्जा वायरस 1997 में और स्वाइन फ्लू वायरस 2009 में आयीं| यहाँ तक कि 14 वीं सदी में फैला बूबॉनिक प्लेट, जिसे ब्लैक डेथ भी कहते हैं, इसका एक और उदाहरण हैं कि इंसानों को कितना नुकसान उठाना पड़ा था|

सार्स महामारी का कारण भी चमगादड़ था-

साल 2002 में फैली सार्स महामारी की शुरुआत चमगादड़ से हुई थी| कोरोना वायरस के पीछे भी यहीं अंदेशा हैं कि यह भी चमगादड़ से फैला हैं| लेकिन इंसानो और जानवरों के बीच यह वायरस फैलने का श्रोत कौन बना, इसके बारे में अभी पता नहीं लगा हैं| लेकिन डेविड हमें यह बताते हैं कि जानवरों से इंसानों में होने वाले संक्रमण लगातार बढ़ रहे हैं और इसकी वजह भी हैं|

आबादी के कारण प्रकृति से हो रहा हैं खिलवाड़-

वे कहते हैं कि इससे पहले इंसानों की आबादी इतनी कभी नहीं रहीं| इसलिए हम प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं| अब ज़्यादा लोग जंगली जानवरों के संपर्क में आ रहा हैं| क्योंकि वे लोग शिकार करते हैं और उन्हें खाते हैं|इसके साथ ही हमारे पास यातायात के बहुत तेज साधन आ गए हैं|

एक वायरस एक इंसान से कुछ घंटों में कितनी तबाही मचा सकता हैं-

मान लीजिए एक वायरस किसी इंसान को संक्रमित कर देता हैं, तो महज बीस घंटे के अंदर वो इंसान आधी दुनिया का सफर तय कर सकता हैं| हम कॉन्गो, बॉर्नियो और ऐमोजोन जैसी जगह पर पहुँच गए हैं| हमनें वहाँ उद्योग लगा दिए हैं| इसलिए हमें अपने स्वार्थ के लिए जानवरों को हानि नहीं पहुंचानी होगी| क्योंकि इससे हमारा और जीवों का नुकसान हैं|

हमें अपने खानपान में बदलाव लाना ही होगा-

डेविड कहते हैं कि अगर हम भविष्य में ऐसी स्थिति से बचना चाहते हैं, तो हमें अपने खानपान में क्रांतिकारी बदलाव लाने होंगे| ताकि जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास को बिगड़ने से रोका जा सके और दूसरा यह कि अगर हम भविष्य में आने वाली महामारियों से बचना चाहते हैं, तो हमें अपने पब्लिक स्वास्थ्य तरीके को दुरुस्त करना होगा|

हमें समझना होगा कि महामारी एक वास्तविक खतरा हैं-

हमें प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होगीं| पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट किट् और जाँच की व्यवस्था तथा वैक्सीन के इंतजाम में हम देरी नहीं कर सकते| पालिटिसियन को समझना होगा कि महामारियां एक वास्तविक खतरा हैं|

दोस्तों, ‘आपको हमारा यह आर्टिकल जानवरों,पक्षियों को खाना ही वायरस के पैदा होने का कारण हैं? Does eating animals, birds cause virus? आप हमें कमेंट करके बताए और हमारे इस आर्टिकल को शेयर और लाइक करना ना भूले|

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Sanjana Singh

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