गड्ढा खोदने से सीखे ध्यान लगाना| Monk King Motivational Story in Hindi.

गड्ढा खोदने से सीखे ध्यान लगाना Monk King Motivational Story in Hindi.
गड्ढा खोदने से सीखे ध्यान लगाना Monk King Motivational Story in Hindi.
गड्ढा खोदने से सीखे ध्यान लगाना Monk King Motivational Story in Hindi.

यह कहानी एक फकीर बाबा कि हैं। जो किसी भी बात को बड़ी अच्छी तरीके से समझाते थे। जिसको भी वह समझाते थे| उसको यह बात हमेशा हमेशा के लिए याद हो जाती थी।

यह बात पूरे राज्य में फैल गई और राजा तक पहुँची। राजा ने सोचा क्यों ना एक बार इस बाबा से मिल लिया जाए।

राजा ने अपने महामंत्री को बुलाया और बोला कि पूरी सेना को तैयार कर दो, ढोल नगाडो के साथ शानदार तरीके से हम बाबाजी से मिलने जायेंगे और थोड़ा सा ज्ञान लेकर उनसे वापस आ जायेंगे।

राजा बाबा से मिलने पहुँचा- 

जब राजा बाबा के पास गए तब बाबा अपने बगीचे में गड्ढा खोद रहे थे। राजा सोचने लगे कि इतने महान बाबा और गड्ढा खोदने का काम खुद कर रहे हैं, अपने शिष्यों से यह काम करवा लेते। राजा ने अपने  महामंत्री से कहा – जाओ उस बाबा जी को बताओ कि उनसे मिलने इस राज्य के राजा आये हैं।

बाबा ने राजा के सैनिकों को अनसुना किया –

महामंत्री सैनिकों के साथ बाबा जी के पास गए और कहा कि बाबा जी आपसे मिलने राजा आये हैं । परंतु बाबा जी उनकी बातों को अनसुना कर के गड्ढा खोदते रहे। यह बात महामंत्री ने सैनिको के साथ जाकर राजा को बताई। राजा को बहुत बुरा लगा और गुस्सा भी आया लेकिन फिर भी वो बाबा जी इंतेजार करते रहे| 

 बाबा खुद राजा से मिलने आए और राजा का गुस्सा –

कुछ देर बाद बाबा अपना काम ख़तम कर के खुद राजा से मिलने आ गए और कहने लगे – आइये राजन् आपका स्वागत हैं। राजा को गुस्सा आ गया और कहा – मैं बहुत देर से आपका इंतेजार कर रहा हूँ। मैं आपसे ज्ञान लेने आया था परंतु आपने मेरा अपमान कर दिया वो भी इतना छोटा सा काम करने के लिए।

फ़क़ीर बाबा ने दिया ज्ञान –

फकीर बाबा ने कहा- कौन सा काम छोटा हैं और कौन सा काम बड़ा है ये तो ऊपर बाला जनता हैं, मैं तो हर काम को बहुत महत्वपूर्ण मानता हूँ और रही बात ज्ञान कि वो मैं तुम्हें पहले ही दे चुका हूँ। तब राजा कहने लगे कि आप तो गड्ढा खोदने में व्यस्त थे तो आपने मुझे  ज्ञान कब दिया? तब फकीर बाबा ने कहा- बेटा जब मैं गड्ढा खोद रहा था, ऐसा तुम्हें लग रहा था कि मैं गड्ढा खोद रहा हूँ लेकिन ऐसा नहीं था।

मैं गड्ढा नहीं खोद रहा था वल्कि गड्ढा खोदने कि जो काम (Process या पुरे तरह से खुद को गड्ढा खोदने में लगाना) था मैं वो बन चुका था। मैं वहाँ पर काम नहीं कर रहा था वो जो काम था, वो अपने आप होता जा रहा था। मैं खुद एक काम बन चूका था था|  मैं गड्ढा खोदने में इतना खो चुका था कि मुझे तुम्हारे किसी सैनिक कि आवाज नहीं सुनाई दी , बस अपना काम किये जा रहा था । वो गड्ढा अपने आप खुदता चला जा रहा था।मैं अपने आप काम किये जा रहा था और जब तक वो काम पूरा नहीं हुआ मुझे पता नहीं चला। जब मेरा काम पूरा  हुआ तो तुम नज़र आये , तुम ध्यान आये और तुमसे मिलने आया।

इस कहानी से शिक्षा –

उस दिन उस फ़कीर बाबा ने राजा को बहुत बड़ी बात सिखाई कि काम छोटा या बड़ा उस काम को अपने अंदर ऐसे बैठा लो की वो काम कोई केवल कार्य न हो कर आपकी आदत सी हैं| और उस काम को पूरा किये बिना आपको दिखाई न दे| और एकाग्रता ( concentration) क्या होती हैं।

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Sanjana

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