सम्राट अशोका और बिच्छू| Ashoka and Scorpion Motivational Story in Hindi.

सम्राट अशोका और बिच्छू| King Ashoka and Scorpion Motivational Story in Hindi.

King Ashoka and Scorpion Motivational Story in Hindi.
प्रेरणादायक कहानी, सम्राट अशोका और बिच्छू|


दोस्तों आज जो यह article आप पढ़ने जा रहे है वो आपको बहुत ही ज़्यादा motivate करेगा और आपको अपनी लाइफ से एक नई सीख सीखने को देगा| तो आइये दोस्तों इस Motivational Article को पढ़ते हैं और कुछ नया जानते हैं-

यह कहानी सम्राट अशोका के समय के हैं|  एक बार सम्राट अशोक अपने बगीचे में घूमने के निकले| घूमते-घूमते उन्हें अपने बगीचे में एक बिच्छू दिखाई देता हैं जो एक वृक्ष के पास था| सम्राट अशोक उस बिच्छू के पास जाते है और उसके पास बैठ जाते हैं
और उसके सामने अपना सर झुका दिया, जैसे ही उन्होंने अपना सर नीचे झुकाया तो सम्राट के साथ उनकी हसीना और उनका वजीर गए हुए थे उन्हें यह दृश्य बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा| सम्राट अशोक और उनके साथ गए हुए आदमी वापस महल आ गए|

इसके वजीर नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि महाराज मे आपसे बहुत नाराज हूँ| आप इतने बड़े सम्राट जिसके मस्तिष्क पर जनता तिलक लगाने को तरसती है| जिसकी कामयाबी की तुलना नहीं की जा सकती है और जो इस दुनिया का सम्राट हैं| उसने अपना सर बिच्छू के रखा मुझे कुछ समझ में नही

 आया और मुझे यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा| सम्राट अशोक ने उस समय कुछ भी नहीं कहा| सम्राट अशोक केवल हसते रहे मुस्कराते रहे| जब एक – डॉ महीने बीत गए तो उन्होंने अपने वजीर को बुलाया और कहा कि तुम एक काम करो तुम यह थैला लेकर जाओ हम कुछ प्रयोग कर रहे हैं इस थैले मे जो सामान हैं उसे बेचकर आ जाओ| सारा सामान बेचकर आना

वजीर ने उस समय उस थैले मे देखा नहीं क्योंकि महाराज को अच्छा नहीं लगता| वजीर उस थैले को लेकर महल के बाहर निकल जाता है और बाहर जाकर वह उस थैले मे देखता है तो उसे उसमे चार सर दिखाई देते हैं|

उसमे एक था भैंसे का सर, एक था गाय का सर और एक बकरी का और एक इंसान का सर था| वजीर ने जब यह देखा तो उसे कुछ समझ नहीं आया| वो उसे लेकर गया बाजार में मे और उसने उन्हें बेचा| उसने भैंसे का सर बेच दिया, बकरी का सर बेच दिया और गाय का सार भी उसने बेच परंतु उसके पास एक सर रह गया जो कि इंसान का था|

उसे समझ मे नहीं आया कि वो उसे कैसे बेचे उसने कई लोगों से बोला कि खरीद लीजिए-खरीद लीजिए| उसे बेचते – बेचते शाम हो गयी परन्तु वह इंसान का सर नहीं बेच पाया और वह महल के लिए  लौट गया| वह सम्राट अशोक के पास गया और बोला हुजूर माफ़ी मेने सारे सर बेच दिए parantu यह इंसान का सर मे नही बेच पाया| किसी ने भी यह इंसान का सर नहीं खरीदा|

तो सम्राट अशोक ने कहा कि तुम एक काम करो तुम कल वापस इसे बेचने जाना और अबकी बार तुम इसे फ्री मे दे आना| bs तुम इसे बेचकर आ जाओ और थैला खाली कर के ले आओ| महाराज ने कहा कि मुझे तुम बस खाली थैला लाकर दे दो, वजीर फिर से अगले दिन वो थैला लेकर निकला और उसने कई लोगों से कहा

कि भाऊसाहब इस सर को आप रख लीजिए लेकिन सभी ने उससे कहा कि तुम पागल हो गए हो क्या कोई इंसान का सर क्यों लेगा और अगर किसी ने हमे इसके साथ देख लिया तो हमने काल-कोठरी मे जाना पड़ेगा| is दिन भी वजीर उसे नहीं बेच पाया और वह वापस महल आ गया उसने राजा से माफ़ी माँगी और कहा कोई भी इसे फ्री मे लेने को भी तैयार नहीं हैं अब आप ही बताइए की मैं क्या करूं? अशोका ने कहा कि तुम्हें अब समझ मे आया तुम उस दिन मुझे तुम सर झुकाने के लिए गलत बता रहे थे| मेरे मरने के बाद मेरे सर की कोई कीमत नहीं|

क्या तुम मेरे मरने के बाद मेरे सर को बेच पाओगे या अपने पास रखोगे| तो उस वजीर ने कहा नहीं महाराज मुझे माफ़ी दे| 

यह छोटी से कहानी हमने ये सीख देती हैं कि जिंदगी में अहंकार का कोई महत्व नहीं होता जो अहंकारी होते है उन्हें मारने के बाद कोई नहीं पूछता|

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Sanjana

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