बकरीद का त्यौहार| Bakra Eid, Eid Ul Adha, Eid Ul Jua In Hindi.

इस साल बकरीद (bakar eid ) 22 अगस्त को को मनाई जाएगी , बकरीद इस्लाम के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है | मुस्लिम लोग साल भर में दो  बार ईद मनाते हैं. एक को ‘मीठी ईद’ कहा जाता है. और दूसरी को ‘बकरीद’| बकरीद को ईद-उल-अजहा (eid ul adha)  या ईद-उल-जुहा (eid ul jua) भी कहा जाता हैं

मीठी ईद सबको प्रेम करने का संदेश देती है तो बकरीद अपना कर्तव्य निभाने का |  साथ ही बकरीद को कुर्बानी का दिन भी होता है. इसलिए बकरीद के दिन बकरे या किसी अन्य पशु की कुर्बानी दी जाती है.


बकरीद का अर्थ

आमतौर पर हम सभी जानते हैं कि बकरीद के दिन मुस्लमान लोग बकरे की कुर्बानी देते  हैं। मुस्लिम समाज में बकरा पाला जाता हैं और अपनी – अपनी हैसियत देखकर ही बकरे की देखभाल व उसे खाने के लिए हरी भरी घास खिलाते हैं ,जब वह अच्छा बड़ा हो जाता हैं फिर उसको बकरीद के दिन अल्लाह के लिए कुर्बान कर दिया जाता हैं, जिसे हम लोग फ़र्ज़ -ए- कुर्बान कहते  हैं।।

बकरीद की कहानी का इतिहास व किसकी याद में मनाया जाता हैं

इस इस्लामिक त्यौहार के पीछे एक ऐतिहासिक राज छिपा हुआ हैं जिसमे कुर्बानी की कुछ ऐसी दास्तान हैं । जिसको सुनकर दिल कांप उठता हैं । बात उन हजरत इब्राहीम की हैं जिन्हें अल्लाह का बन्दा माना जाता है, जिनकी इबादत पैग़म्बर के तौर पर की जाती हैं।

जिन्हें हर एक इस्लामिक द्वारा अल्लाह का दर्जा प्राप्त हैं , जिसे इस औदे से नवाजा गया उस शख्स का खुद खुदा ने इम्तिहान लिया उस समय बात कुछ थी , खुदा ने हज़रत मुहम्मद साहब का इम्तिहान लेने के लिए उन्हें यह आदेश दिया की वे तब ही  खुश होंगे, जब हज़रत इब्राहीम अपनी कोई बेइंतहा अजीज को अल्लाह के सामने कुर्बान करेंगे तब हज़रत ने कुछ देर सोचने के बाद निर्णय लिया और अपनी अजीज को कुर्बान करने का तय किया।

वहाँ सबने यह जानना चाहा की वो क्या चीज है जो हजरत इब्राहीम की सबसे चहेती है जिसको वो आज अल्लाह के सामने कुर्बान कर देंगे। तब पता चला की वो अनमोल चीज व अजीज उनका बेटा हज़रत इस्माइल हैं। जिसे वो अल्लाह के लिए कुर्बान करने जा रहे है, यह बात जानकर सभी लोग हैरान हो गए,

कुर्बानी का समय करीब ही आ गया उन्होंने अपने बेटे को कुर्बानी के लिए तैयार किया गया, लेकिन इतना आसान न था। इस कुर्बानी को अदा करना हज़रत इब्राहीम जी के लिए आसान नही था , इसलिए हजरत इब्राहीम ने अपनी आँख पर पट्टी बांध ली और अपने बेटे की कुर्बानी दी  ,

जब उन्होंने आंखों पर से पट्टी हटाई तब उन्होंने अपने बेटे को सुरक्षित देखा, उसकी जगह इब्राहिम के अजीज बकरे की कुर्बानी अल्लाह ने क़ुबूल की हजरत इब्राहीम के कुर्बानी के इस जस्बे से खुश होकर अल्लाह ने उसके बेटे की जान बक्श दी और उसकी जगह बकरे की कुर्बानी को क़ुबूल किया गया।

तभी से ही कुर्बानी का मंजर चला आ रहा है जिसे बकरीद ईद-उल-जुहा के नाम से दुनिया जानती हैं ।

बकरीद में बकरे की सेवा

इस्लाम में हज करना जिंदगी का सबसे जरूरी भाग माना जाता हैं , जब वे हज करके लौटते हैं तब बकरीद पर अपने अजीज की कुर्बानी देना भी  इस्लामिक धर्म का एक जरुरी हिस्सा हैं, जिसके लिए एक बकरे को पाला जाता हैं , दिन रात उसकी सेवा की जाती हैं ऐसे में उस बकरे से भावनाओ का जुड़ना आम बात है

कुछ समय बाद बकरीद के दिन उस बकरे की कुर्बानी दी जाती हैं, न चाहकर भी हर एक इस्लामिक का उस बकरे से नाता जुड़ जाता हैं, इस्लामिक धर्म के अनुसार इससे कुर्बान हो जाने की भावना बढ़ती हैं, इसलिए इस तरह का रिवाज चला आ रहा हैं।।


बकरीद कैसे मनाई जाती हैं

. सबसे पहले ईद गाह में सलत पेश की जाती हैं।

. पूरे परिवार एवं जानने वालों के साथ मनाई जाती हैं।

. सबके साथ भोजन किया जाता हैं।

. नए कपड़े पहने जाते हैं।

. तोफहे दिए जाते हैं, खासतौर पर गरीबो का ध्यान रखा जाता हैं उन्हें भोजन और पहनने को कपड़े दिए जाते हैं।

. ईद की प्रार्थना नमाज अदा की जाती हैं।

. इस दिन बकरे के अलावा गाय, बकरी ,भैंस , और ऊँठ की कुर्बानी दी जाती  हैं।

. कुर्बान किया जाने वाला जानवर देख परख कर पाला जाता हैं अर्थात उसके सारे अंग सही सलामत होना जरुरी हैं वह बीमार नही होना चाहिए, इस कारण ही बकरे का बहुत ध्यान रखा जाता हैं।

. बकरे को कुर्बान करने के बाद उसके मांस का एक तिहाई हिस्सा खुदा को , एक तिहाई घर वालों एवं दोस्तों को और एक तिहाई गरीबो में दे दिया जाता हैं ।

इस प्रकार इस्लाम में बकरीद का त्यौहार मनाया जाता हैं हर त्योहार प्रेम और शांति का प्रतीक होते हैं जिस प्रकार इस्लाम मे कुर्बानी का महत्व होता हैं उसी प्रकार हिन्दू में त्याग का महत्व होता हैं ,दोनो का आधार अपने आस पास प्रेम देना हैं और उनके जीवन के लिए कुर्बानी अथवा त्याग करना हैं|

इसी भावना के साथ सभी धर्मों में त्यौहार मनाये जाते हैं लेकिन कलयुग के इस दौर में त्यौहारों के रूप बदलते जा रहे हैं और ये कही न कहीं दिखावे की तरफ़ रुख करते नज़र आ रहे हैं।

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