मुहर्रम / आशुरा का त्यौहार| Indian Festival Muharram Ashura In Hindi.

 



मुहर्रम का पर्व / Festival of Muharram


Muharram Ashura-Hindi Article


मुहर्रम क्या हैं ?/What is Muharram ?

मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता हैं और मुस्लिमो के अनुसार यह वर्ष का पवित्र महीना माना जाता हैं| मुस्लिम लोग मुहर्रम का पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं| मुहर्रम के 10 वे दिन का बहुत महत्व हैं जो हुसैन इब्र अली की मृत्यु का शोक के लिए शिया मुस्लिमो द्वारा मनाया जाता हैं|

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मुहर्रम कब मनाया जाता है ?/When is Muharram celebrated ?

मुहर्रम के दस दिनों को आशुरा के तौर पर मनाया जाता हैं| इस पुरे महीनो को शहादत के रूप में मनाया जाता हैं| इस दिन रोजा रखने का महत्व होता हैं| इस वर्ष मोहर्रम 21 सितम्बर, 2018 में शुक्रवार के दिन मनाया जायेगा|

मुहर्रम कैसे मनाया जाता हैं?/How are Muharram celebrated ?

  1. इसे पाक का महीना माना जाता हैं, इस दिन को शिद्दत के साथ सभी इस्लामिक धर्म को मानने वाले मनाते हैं |
  2. मोहर्रम के दिनों में रोजे भी रखे जातें हैं, जिन्हे आशुरा कहा जाता हैं |
  3. कई लोग 10 दिनों तक रोजा न रखकर पहले और अंतिम दिन रोजा रखते हैं  |
  4. इसे इबादत का महीना भी कहा जाता हैं, हजरत मुहम्मद के अनुसार इन दिनों रोजा रखने से हमारे बुरे कर्मो का नाश होता हैं|अल्लाह की रहम होती है इसलिए हमारे गुनाह माफ होते हैं |


मुहर्रम क्यों मनाया जाता हैं ?/Why are Muharram celebrated ?

इराक में एक यजीद नामक जालिम बादशाह था जो इंसानियत का दुश्मन था| हजरत इमाम हुसैन ने जालिम बादशाह यजीद के विरुद्ध जंग का एलान कर दिया था| मोहम्मद-ए-मस्तफा के नवासे हजरत इमाम हुसैन को करबला नमक एक स्थान में अपने परिवार और दोस्तों के साथ उन्हें शहीद कर दिया गया उसी समय मुहर्रम का महीना चल रहा था| उस दिन 10 तारीख थी जिसके बाद इस्लाम धर्म के लोगों ने इस्लामी कैलेंडर के नये साल को मनाना छोड़ दिया बाद में मुहर्रम का महीना गम और दुःख के महीने बदल गया |

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मुहर्रम का इतिहास/History of Muharram.

यह एक कष्टदायक और दुखभरी कहानी हैं, लेकिन लोगो को यह कहानी बहादुरी की मिसाल के तौर पर देखा जाता हैं| यह समय सन 60  हिजरी का था, उस समय कर्बला जिसे सीरिया के नाम से जाना जाता था| वह यजीद इस्लाम का शहंशाह बनना चाहता था, जिसके लिए उसने अवाम के लोगों में खौफ फैलाना शुरू दिया सभी को अपना गुलाम बनाने के लिए उसने सभी को नरक जैसा कष्ट पहुँचाया |

यजीद पुरे अरब पर अपना रुतवा चाहता था लेकिन उसने तनाशाह के आगे हजरत मुहम्मद के पुत्र इमाम हुसैन और उनके भाइयों ने यजीद के सामने घुटने नहीं टेके , और डटकर उनसे संघर्ष किया, अपनी बीवी बच्चो को हिफाजत देने के लिए इमाम हुसैन मदीना से इराक की ओर जा रहे थे|


तब उसी समय यजीद ने उन पर हमला किया वह स्थान एक गहरा रेगिस्तान था जिसमे पानी की एक नदी थी| जिस पर यजीद ने अपने सिपाहियों को तैनात कर दिया। लेकिन फिर भी इमाम और उसके भाइयों ने डटकर उनका मुकाबला किया| वे लगभग 72 लोग थे जिन्होने यजीद के 8 हजार  सैनिको की फौज को दाँतों तले चने चबा दिए थे| उन्होंने उनसे ऐसा मुकाबला किया की दुश्मन भी उनकी तारीफ कर रहें थे| लेकिन वह जीत नहीं सकते थे क्योंकि वह सभी तो कुर्बान होने आये थे|

दर्द ,तकलीफ सहकर फुके प्यासे रहकर भी उन्होंने लड़ना स्वीकार किया और यह लड़ाई मोहर्रम 2 से 6 दिन चली| आखिरी दिन इमाम ने अपने सभी साथियों को कब्र में सुलाया| लेकिन खुद स्वयं अंत तक लड़ते रहें| यजीद के पास कोई उपाय नहीं बचा और उनके लिए अब  इमाम को मारना नामुमकिन सा हो गया था |

मोहर्रम के 10 वे दिन जब इमाम नमाज अदा कर रहे थे तब उनके दुश्मनो ने उनको धोखे से मार दिया|इस प्रकार यजीद को मारने में सफल हुआ, लेकिन हौसलों के साथ मर कर भी जीत इमाम की ही हुई और शहीद कहलाये | तख्तो तो ताज जीत कर भी यह लड़ाई यजीद के एक बड़ी हार थी |


ताजिया क्या हैं ?/What is Tajiya?

यह शिया मुस्लिमो का अपने पूर्वजो को श्रद्धांजलि देने का एक उपाय हैं| मुहर्रम के दस दिनों तक बांस की लकड़ी का प्रयोग कर अलग-अलग प्रकार से लोग इसे सजाते हैं और 11 वे दिन इन्हे बाहर निकाला जाता हैं  |

लोग इन्हे सड़को और गलियों में लेकर पूरे नगर में घूमते हैं| सभी इस्लामिक धर्म के लोग इसमें एकत्रित होते हैं| इसके बाद इन्हे इमाम हुसैन की कब्र बनाकर दफना दिया जाता हैं | एक तरीके से 60 हिजरी में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती हैं |

आपको और पूरे देश को यह बता दे कि मोहर्रम कोई त्यौहार नहीं हैं, बल्कि मातम मनाने का दिन हैं| जिस स्थान पर इमाम हुसैन को शहीद किया गया था वह इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में एक छोटा सा क़स्बा हैं| मोहर्रम के दिन जुलूस भी निकाले जाते हैं |

जुलूस में क्या करते हैं/What do in a procession.

इस दिन लोग करबला के खूनी युद्ध की कहानी सुनाते हैं| संगीत से बचते हैं और शादी -विवाह जैसे खुशहाल जगहों पर नहीं जाते हैं| मोहर्रम के 10 वे दिन वह रंगीन कागजो और बांस के शहीद चित्रणों के साथ सड़को और गलियों में निकालते हैं| कुछ लोग अपने आप को खून निकलने तक कोड़े भी मारा करते हैं जबकि कुछ लोग नाचकर कर्बला के युद्ध का अभिनन्दन करते हैं |

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