करवा चौथ का त्यौहार| Karva Chauth Festival in Hindi.

 Karwa Chauth Festival  || why and how Karva Chauth is celebrated ?||Hindi Article



Karwa Chauth/Karva Chauth katha

करवा चौथ हिन्दुओ का प्रमुख त्यौहार है , यह भारत के पंजाब ,उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , हरियाणा , मुंबई और राजस्थान का पर्व हैं | यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता हैं | यह पर्व सुहागन स्त्रियाँ मनाती हैं और यह व्रत सुबह सूर्यौदय से पहले करीब 4 बजे के बाद शुरू हो जाता हैं और रात में चन्द्रमा के दर्शन जब हो जाते है |

तब यह व्रत सम्पूर्ण हो जाता हैं | ग्रामीण स्त्रियो से लेकर आधुनिक महिलाओं  तक सभी नारियां इस व्रत को श्रद्धा के साथ रखती हैं | और विधि पूर्वक इस व्रत को पूरा करती हैं |

करवा चौथ क्यों मनाया जाता है ?

हर त्यौहार को  मनाने के पीछे कोई न कोई कारण होता हैं |  ठीक उसी प्रकार करवा चौथ के पर्व को भी अपने पति की दीर्घ आयु के लिए ही  मनाया जाता हैं | सभी सुहागन महिलाएं इस पर्व को बड़ी उत्साह के साथ मनाती है  और इस दिन सभी महिआएं अपने हाथो में मेहंदी लगाती हैं और पूरे विधि -विधान से इस व्रत को पूरा करती हैं|

करवा चौथ की विधि

. सूर्यौदय होने से पहले स्नान करके व्रत रखने का निर्णय लेना |

. उसके बाद मिठाई ,पूडी , फल , सेवई या अन्य किसी भी तरह के पकवान ग्रहण करके , व्रत शुरू करें |

. फिर शिव , पार्वती , गणेश ,कार्तिके  और श्रीकृष्ण जी की स्थापना करें |

. गणेश जी को पीले फूलो की माला व लड्डू चढाये  |

. करवा चौथ में भी संकष्टी गणेश चतुर्थी की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा  को अर्घ्य दे |

. मिट्टो के कर्वे पर रोली से स्वस्तिक बना ले |

. कर्वे में दूध , जल , गुलाबजल , मिलाकर रखें और रात को छलनी के प्रयोग से चंद्र दर्शन करे और चन्द्रमा को अर्घ्य दे |

. इस दिन करवा चौथ की कथा कहनी या सुननी चाहिए |

. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और बहुत ही खूबसूरत लगती हैं |

. कथा सुनने के बाद  अपने से बड़ो के पैर छू कर आशीर्वाद लेना चाहिए  |


करवा चौथ पर चाँद को ही क्यों पूजा जाता हैं ?

रामचरित्र मानस के लंका कांड के अनुसार जिस समय श्री राम समुन्द्र पार  करके लंका में स्थित एक पर्वत पर उतरे और श्री राम ने पूर्व दिशा में चन्द्रमा को चमकते हुए देखा तो अपने साथियों से पूछा चन्द्रमा में जो कालापन है वो  क्यों हैं ? और क्या हैं ? सभी ने अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार जवाब दिया किसी ने कहा कि चन्द्रमा में पृथ्वी की छाया दिखाई देती है ,

तो किसी ने कहा राहु के मार्ग के कारण चन्द्रमा में कालापन है , किसी ने कहा आकाश की काली छाया उस पर दिखाई देती हैं , तब भगवान्  श्री राम ने कहा की विष (जहर ) चन्द्रमा का बहुत प्यारा भाई हैं इसलिए चंद्रमा ने विष को अपने हृद्य में स्थान दे रखा हैं |

जिसके कारण चन्द्रमा में कालापन दिखाई देता हैं | अपने विष की किरणों को जलाकर वियोगी नर -नारी को जलाता रहता हैं | इस पुरे प्रसंग के पीछे मनोवैज्ञानिक पक्ष है | जिससे पति – पत्नी किसी कारण वश एक दूसरे से अलग हो जाते हैं ,और चन्द्रमा की विष की किरणें उन्हें अत्यधिक हानि पहुँचाती हैं |

इसलिए करवा चौथ के दिन चन्द्रमा की पूजा कर  महिलाएं यह कामना करती हैं कि किसी भी कारण उन्हें अपने पति का वियोग न सहना पड़े | यही कारण है की करवा चौथ के दिन चन्द्रमा की पूजा की जाती हैं |


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छलनी से ही क्यों देखा जाता हैं चन्द्रमा ?

हिन्दू धर्म में कई पर्व व व्रत के साथ कई परम्पराओं का विधान हैं ,कुछ परम्पराओं का वैज्ञानिक पक्ष हैं और धार्मिक, कुछ मनोवैज्ञानिक पक्ष का हैं | करवा चौथ पर छलनी से चन्द्रमा को व पति को देखकर भोजन करने का विधान हैं |

परम्परा के अनुसार करवा चौथ का पूजन करते समय सर्वप्रथम वैभाहित महिला चन्द्रमा को देखती हैं बाद में अपने पति को देखती हैं ,ऐसा करने के पीछे कोई वैज्ञानिक पक्ष नहीं होता हैं | बल्कि अपने अपने हृद्य की भावना होती है | पत्नी जब छलनी  से अपने पति को देखती हैं |

तो वह अपने पति से कहती हैं की मेने अपने हृद्य के सभी विचारो और भावनाओ को छलनी में चाल कर दूर कर दिया हैं | और अब मेरे मन में सिर्फ आपके लिए प्रेम और सच्चे पैर की भावना ही बची है | इसलिए ही छलनी से चन्द्रमा को उसके बाद अपने पति को देखने की  परम्परा चली आ रही हैं |

करवा चौथ माता जी का प्रसिद्ध मंदिर

हमारे भारत देश में वैसे तो चौथ माता जी के बहुत मंदिर हैं ,लेकिन ऐसा माना जाता हैं कि राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले के  चौथ बरवाड़ा में प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिर स्थित हैं ,चौथ माता जी के नाम पर ही इस गांव का बरवाड़ा से चौथ का बरवाड़ा नाम पड़ गया |

चौथ माता जी मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान जी ने की थी | लोग यहां श्रद्धापूर्वक आते हैं और माता जी के दर्शन करते हैं | और माता जी से अपने परिवार के सुख , सम्पत्ति और एक दूसरे के प्रति प्यार मांगते हैं |

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