वसंत पंचमी का त्यौहार| Happy Vasant Panchmi in Hindi.

वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ| Happy Vasant Panchmi in Hindi.



वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ| Happy Vasant Panchmi in Hindi.वसंत पंचमी (Vasant Panchmi), हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल माघ महीने शुक्ल की पंचमी को विद्या और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती की उपासना की जाती हैं|

यह दिन साल के कुछ खास दिनों में से एक माना जाता हैं इसलिए कुछ लोग इसे “अबूझ मुहूर्त” भी कहते हैं| पौराणिक मान्यता हैं कि जिन लोगों की कुंडली में विद्या और बुद्धि का योग नहीं होता हैं,वह लोग वसंत पंचमी को माँ सरस्वती को पूजा करके उस योग को ठीक कर सकते हैं|

इस साल पूरे भारत में बसंत पंचमी 10फरवरी को मनाई जाएगी|  

साहस शील ह्रदय में भर दे,

जीवन त्याग तपोमय कर दे,

संयम सत्य स्नेह का वर दे,

माँ सरस्वती

आपके जीवन में उल्लास भर दे|  



वसंत पंचमी

वसंत पंचमी या श्रीपंचमी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार हैं, और कुछ लोग माँ सरस्वती की अराधना के नाम से भी इस पर्व को जानते हैं|इस दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती हैं|यह पूजा पूर्वी भारत,पश्चिमीउत्तर बांग्लादेश,नेपाल कई राष्ट्रों में उल्लास के साथ मनाई जाती हैं|

जीवन का यह वसंत,खुशियाँ दें अनंत  

प्रेम और उत्साह से भर दे,जीवन में रंग

वसंत पंचमी की कथा-

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों और मनुष्य योनि की रचना की| अपनी सर्जना से ब्रह्मा

जी संतुष्ट नहीं थे| उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गयी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता हैं|  विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का,पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री की थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा थी,अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी|

ब्रह्मा ने वीणा बजाने का अनुरोध किया| जब देवी ने वीणा बजायी,संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गयी| जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया| पवन चलने से सरसराहट होने लगी|

तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की सरस्वती कहा| सरस्वती को बागीश्वरी,भगवती,शारदा और वीणावादनी और वाग्देवो सहित कई नामों से पूजा जाता हैं| ये माँ विद्या और बुद्धिप्रदाता हैं| संगीत के उत्पत्ति करने के कारण इन्हे संगीत की देवी भी कहा जाता हैं|

वसंत पंचमी का दिन सरस्वती माँ के जन्मदिन के रूप मनाया जाता हैं| ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णनं करते हुए कहा गया हैं-

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु!!

अर्थात ये परम चेतना हैं| सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि,प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं| हमसे जो आचार और मेधा हैं उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं| इनकी सृमद्धि और स्वरुप का वैभव अद्भुत हैं|

पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी पूजा की जाएगी और  भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा आज तक जारी हैं|

वसंत पंचमी का पतंगबाजी से कोई सीधा सबंध नहीं हैं| लेकिन पतंग उड़ाने का रिवाज हजारों साल पहले चीन में शुरू हुआ और फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुँचा|

वसंत पंचमी पर्व का महत्व-



वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता हैं| मानव तो क्या पशु-पक्षी तक ख़ुशी से भर जाते हैं| हर दिन नई उमंग से सूर्योदय होता हैं और नई चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता हैं|

वसंत पंचमी का पर्व जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करना हैं| प्राचीनकाल से इन्हें ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता हैं| जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं,वे इस दिन माँ शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं|

कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शास्त्रों और विजयदशमी का हैं,जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का हैं,जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का हैं,वही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का हैं| चाहे वे कवि हो या लेखक,गायक हो या वादक,नाटककार हो या नृत्यकार,सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और माँ सरस्वती की वंदना से  करते हैं|

पूजा करते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-

.वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा करते समय सफ़ेद और पीले वस्त्र पहनने चाहिए|

.ध्यान रखे की लाल और काले वस्त्र पहनकर माँ सरस्वती की पूजा न करे|

.वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके करनी  चाहिए|

.मान्यता यह हैं कि माँ सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले पुष्प बहुत प्रिय हैं इसलिए इस पूजा में इसी का इस्तेमाल करें|

.पूजा के दौरान प्रसाद में दही, लावा, मीठी खीर अर्पित करनी चाहिए|

.पूजा के दौरान माँ सरस्वती के मूल मंत्र “ॐ सरस्वत्यै नमः” का जाप करना चाहिए|



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