धनतेरस का त्यौहार| Indian Festival Dhanteras in Hindi.

 



Dhanteras Festival-Why and how the Dhanteras Festival celebrates?


Dhanteras Festival

हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष त्रियोदशी को मनाया जाता है और धनतेरस के  ठीक दो दिन बाद दीवाली मनाई जाती हैं | कारोबार करने वाले लोगों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही शुभ होता हैं |   क्यूंकि ऐसा माना जाता हैं ,कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि , खुशियाँ और सफलता मिलती हैं | साथ ही सभी के लिए इस पूजा का खास महत्व होता हैं |

 

 

दीवाली से पहले धनतेरस की पूजा करने का महत्व हैं |

धनतेरस के दिन गणेश जी ,लक्ष्मी जी और कुबेर जी पूजा की जाती हैं | धनतेरस यानि  ‘धन” का मतलब लक्ष्मी और कुबेर “तेरस” का मतलब तेरहवाँ दिन होता हैं | ऐसा माना जाता हैं कि धनतेरस के दिन धनवन्तरी जी का जन्म हुआ था |

जो कि समुन्द्र मंथन के दौरान अपने साथ अमृत का कलश व आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे  और इसी कारण से भगवान धनवन्तरी को औषधि का जनक भी कहा जाता हैं और इसलिए इसे धनतेरस  के त्यौहार के रूप में मनाया जाता हैं | धनवन्तरी के उत्पन्न होने के ठीक दो दिन बाद देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थी , इसलिए धनतेरस के ठीक दो दिन बाद दीवाली मनाई जाती हैं |


धनतेरस क्यों मनाया जाता हैं ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राजा बलि के डर  से सबको मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन का अवतार लिया था , जिसके बाद भगवान विष्णु यग स्थल पर जा पहुँचे थे | लेकिन असुरों  के गुरु शुक्राचार्य उनको पहचान गए थे ,कि वामन के रूप में भगवान विष्णु जी हैं | इसलिए उन्होंने राजा बलि से कहा कि वामन कुछ भी मांगे तो उसे न दिया जाये और राजा बलि को बताया जाये  की वामन के रूप में भगवान विष्णु हैं| जो देवताओ की मदद कर रहें हैं , किन्तु राजा बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं सुनी और वामन भगवान द्वारा मांगी हुई तीन पग भूमि देने के लिए तैयार हो गए | लेकिन शुक्राचार्य ऐसा नहीं चाहते थे ,इसीलिए राजा बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य जी राजा बलि के कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर लिया था | लेकिन भगवान वामन भी उनके छल को समझ गए थे , जिसके बाद उन्होंने अपने हाथों  में कुशा को कमंडल में इस तरह रखा कि शुक्राचार्य जी एक आँख फुट गई |


कहा जाता हैं कि  वामन भगवान द्वारा मांगी हुई तीन पग भूमि को बलि ने दान करने का निर्णय ले लिया | उस समय भगवान वामन ने अपना एक पैर से पूरी धरती को नाप लिया और दूसरा पैर से पूरी अंतरिक्ष को नाप लिया | लेकिन तीसरा पैर रखने के लिए उनके पास कोई जगह नहीं बची थी | जिसके बाद बलि ने भगवान वामन के सामने अपना सिर रख दिया था |

देवताओं  को बलि के डर से इस तरह से मुक्ति मिली थी और इसी जीत की ख़ुशी में धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता हैं |

धनतेरस  की पूजा कैसे करें ?

यम दीपक कैसे जलाये ?

  1. सबसे पहले नहा- धोकर संध्या के समय यम दीपक जलाये , उसके बाद  पूजा स्थान पर स्वस्तिक का निशान बना लें , फिर उसके ऊपर एक दीपक रखिये और उस दीपक को जला लीजिये |
  2. अब उसमे एक छेद वाली कोड़ी ,एक रुपए का सिक्का और थोड़ी सी चीनी डाल दे और फूल भी अर्पण करें , उसके बाद प्रार्थना करें|
  3. उसके बाद अपने परिवार के सदस्यों को तिलक लगाए |
  4. दीये को उठाकर घर के  मुख्य द्वार के बाहर दाहिनी ओर रख दे |

धनवन्तरी पूजा कैसे करें ?

अपने पूजा घर में बैठकर , भगवान  धनवन्तरी का ध्यान करें और भगवान धन्वन्तरी के  मन्त्र “ ॐ धं धन्वन्तरये नमः “ का 108 बार जप करें |

जप के अंत में कहे “ हे भगवान धन्वन्तरी “ यह जप आपके चरणों में समर्पित करता/ करती  हूँ | कृपया हमें उत्तम स्वस्थ प्रदान करें |

गणेश और लक्ष्मी की  पूजा कैसे करें ?

अपने घर और मंदिर दोनों की साफ़ सफाई अच्छे  से करें | उसके बाद मंदिर में रंगीन पेपर से उसको सजा दे फिर मंदिर में गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति को स्थापित करें | उनको तिलक लगाकर ,माला पहनाकर , धूप – अगरवत्ती जलाये और कपूर से उनकी आरती करें | और गणेश जी और लक्ष्मी जी को भोग लगाए फिर उनके मंत्रो का उच्चारण करें |  इसके बाद अपने परिवार के लिए सुख और शांति की मनोकामना करें |


खास क्या करें इस दिन ?

इस दिन अपने सामर्थ्य अनुसार किसी भी रूप में चाँदी या सोना एवं अन्य धातु खरीदना शुभ माना जाता हैं | धन सम्पति की प्राप्ति के लिए कुबेर देवता के लिए घर के पूजा स्थल पर दीप दान करें  एवं मृत्यु देवता यमराज के लिए मुख्य द्वार पर एक दीप दान करें | इस दिन अपने घर की साफ – सफाई जरूर करें |

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता हैं |

  1. धनतेरस के दिन चाँदी , सोना , के अलावा आप नए बर्तन भी खरीद सकते हैं ,यह शुभ माना जाता हैं |
  2. यदि धनतेरस के दिन चाँदी के बर्तन ख़रीदे जाये तो इसे चंद्रमा का प्रतीक माना जाता हैं , जो शीतलता प्रदान करता हैं |
  3. धनतेरस के दिन घर में दक्षिणा वर्ती शंख लाना भी शुभ माना  जाता हैं |
  4. धनतेरस के दिन आप गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति भी खरीद सकते है , जिनकी पूजा दीवाली में की जाती हैं |
  5. धनतेरस के दिन  गाड़ी खरीदना भी शुभ माना जाता हैं | लेकिन इसके अलावा कंप्यूटर , मोबाइल और बिजली के उपकरण खरीदना भी शुभ माना जाता हैं |
  6. धनतेरस के दिन आप नया झाड़ू भी खरीद सकते हैं | इसे साफ-सफाई और माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता हैं |

धनतेरस पर क्या खरीदना अशुभ माना जाता हैं ?

  1. धनतेरस के दिन तेल खरीदने से बचे |
  2. धनतेरस के दिन काले कपड़े  खरीदने से बचे और न ही काले कपड़े  धारण करें |
  3. धनतेरस के दिन शीशा खरीदना भी बहुत अशुभ माना जाता हैं |, इसलिए इस दिन शीशा खरीदने से भी बचे |
  4. एल्युमीनियम के बर्तन धनतेरस पर खरीदना अशुभ माना जाता हैं | ग्रंथों के अनुसार एल्युमीनियम पर राहू का वास रहता हैं |
  5. धनतेरस पर कोई नुकीला सामान जैसें चाकू , कैंची ,छुरी और लोहे के बर्तन नहीं खरीदना चाहिए |

दिनों दिन बढता जाए आपका कारोबार

परिवार में बना रहें स्नेह और प्यार

होती रहें सदा आप पर धन की बौछार

ऐसा हो आपका धनतेरस का त्यौहार

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