भाई दूज का त्यौहार| Bhai Dooj Wishes Message in Hindi.

Happy Bhai/Bhaiya Dooj in hindi

 



Why And How We Are Celebrated Bhai/Bhaiya Dooj Celebrated in Hindi. Importance of Bhai Dooj in Hindi.


Happy Bhai/Bhaiya Dooj in hindiदिवाली हिन्दुओं का सबसे प्रमुख त्यौहार हैं और पांच दिन तक ये त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हैं पांचवे दिन भाई दूज मनाने की परम्परा सदियों से चली आ रही हैं |

भाई दूज को यम चंद्र मास प्रत्येक पक्ष की दूसरी तिथि भी कहा जाता हैं | भाई दूज का पर्व भाई – बहन के रिश्ते को दर्शाता हैं , जिसको सभी बहने बड़ी श्रद्धा भाव से मनाती हैं |

भाई दूज का महत्व क्या हैं ?


भाई दूज के दिन भाई अपनी बहन के घर जाते हैं , माना जाता हैं कि  ऐसा करने से धन , यश , आयुष्य , धर्म , अर्थ और सुख की प्राप्ति होती हैं |

इस दिन सभी बहने अपने भाइयों को उचित स्थान पर बैठाती हैं , फिर वे उनकी आरती और रोली से उनको तिलक लगाती हैं | इसके बाद वे स्वंय अपने हाथो से अपने भाइयों के लिए उनकी पसंद का खाना बनाती  हैं और उनको खिलाती हैं |

भाई दूज कैसे मनाया जाता हैं ?

भाई दूज का पर्व दिवाली के तीसरे दिन मनाया जाता हैं | इस दिन शादी – शुदा बहने अपने भाइयों को अपने घर बुलाती हैं और इनको भोजन पर आमन्त्रित करती हैं और गोबर से भाई दूज परिवार का निर्माण करती हैं , उसका पूजन अर्चन करके भाई को भोजन कराती हैं | बहन अपने भाई को तिलक लगाकर ,उपहार देकर उसकी लम्बी आयु की प्रार्थना करती हैं | और ऐसा भी माना जाता हैं कि अगर भाई इस दिन गंगा में स्नान  करें , तो उनके सारे दुःख – दर्द दूर हो जाते हैं और उनकी आयु लम्बी भी हो जाती हैं |

भाई से जुडी कुछ मान्यताएं हैं जिनके आधार पर अलग-अलग देशों  में इसे अलग- अलग तरह से मनाते हैं |

भाई दूज की पौराणिक कथा

शास्त्रों के अनुसार कहा जाता हैं कि सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था | छाया की कोख से यमराज और यमुना जी का जन्म हुआ था | यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्यार करती थी | वह उनसे बराबर निवेदन करती थी कि वे अपने इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करें | अपने कार्य में यमराज जी बहुत व्यस्थ रहा करते थे इसलिए वह यमुना जी की बातों को टालते रहते थे | कुछ समय बाद कार्तिक शुक्ल का दिन आया , फिर यमुना जी ने यमराज जी से फिर उनको अपने घर पर भोजन के लिए निमंत्रण देकर उनको वचनबृद्ध कर लिया |

यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणो को हरने वाला हूँ फिर भी वो मुझको कितने  प्यार से बुलाती हैं, और बहन मुझे जिस श्रद्धाभाव से बुला रही हैं , उसका पालन करना मेरा धर्म हैं |उन्होंने बहन के घर आते समय नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया | यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की  ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा | उसने स्नान कर , पूजा करके अपने भाई को व्यंजन परोसकर भोजन कराया | यमुना द्वारा दिए गए आतिथ्य से यमराज बहुत प्रसन्न होकर , बहन से वर मांगने का आदेश दिया |

यमुना ने कहा कि भद्र ! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो | मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई का आदर , सत्कार करके टीका करे , तो उसको आपका भय न रहें | यमराज ने तथास्थु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की ओर चले गए |

इसी दिन से भाई दूज मनाने की परम्परा शुरू हुई थी | ऐसी मान्यता है जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं , उन्हें यम का भय  नहीं रहता | इसीलिए भैया दूज के दिन यमराज और यमुना का पूजन किया जाता हैं |


याद हैं हमारा वो बचपन,

वो लड़ना- झगड़ना और मनाना

यहीं होता हैं बहन भाई का प्यार ,

इसी प्यार का प्रतीक हैं

“भाई दूज” का त्यौहार |

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