हमें किसी को जज करने का अधिकार नहीं हैं| Don’t judge Motivational Story in Hindi.

हमें किसी को जज करने का अधिकार नहीं हैं| Don't judge Motivational Story in Hindi.

हमे कभी किसी को बिना सोचे समझे जज नहीं करना चाहिए|
Don’t judge anyone Motivational Story in Hindi.


 Don't judge Motivational Story in Hindi.
हमें किसी को जज करने का अधिकार नहीं हैं|

दोस्तों हमें ज़िन्दगी में कभी भी किसी व्यक्ति को Judge नहीं करना चाहिए| क्योंकि सभी अपनी जगह सही होते हैं,हमें उन्हें बिलकुल भी Judge नहीं करना चाहिए क्योंकि क्या पता आपका उस व्यक्ति पर Judge करना आपके ऊपर ही भारी पड़ जाए|

आज हम ऐसी ही एक Motivational Story पढ़ते हैं, जिससे हमें यह सीख मिलेगी कि हमें दूसरों को Judge नहीं करना चाहिए|

एक बार एक बस तीर्थ स्थान से यात्रा करके वापस अपने नगर की ओर लौट रही थी| उस बस में सब कुछ ठीक चल रहा था|

और उस बस में बैठे सभी लोग भगवान का गुणगान कर रहे थे,भजन-कीर्तन कर रहे थे| अचानक मौसम बिगड़ गया और थोड़ी ही देर में बारिश शुरू हो गयी और कुछ ही देर में आँधी-तूफ़ान चलने लगा|

वहाँ पर बिजली कड़कने लगी और बिजली चमकने लगी और एक बार ऐसा भी हुआ कि बिजली बस के थोड़ी ही दूर पर बिजली गिरी|

यह सब देख बस में बैठे यात्री घबरा गए और हाथ जोड़कर भगवान से माफ़ी माँगने लगे और पूछने लगे कि ऐसी क्या गलती हो गयी भगवान

,हमने आपके दर्शन किये अपने पापों का नाश किया अगर फिर भी कुछ रह गया हो तो भगवान हमें माफ़ कर देना|

जैसे ही थोड़ी दूर बस और आगे गई तो एक बार फिर से बस के आगे बिजली गिरी और यह जो यात्री सफर कर रहे थे,बिल्कुल मरते-मरते बचे|

बस के ड्राइवर ने बस रोकी और ड्राइविंग सीट से उतरकर पैसेंजर्स के पास गया और उनसे कहने लगा देखो आज एक बात कहना चाहता हूँ|

आज हमारी बस में एक ऐसा आदमी यात्रा कर रहा हैं,जिसकी मौत पक्की हैं,जिसे ऊपर वाला अपने पास बुलाना चाहता हैं और शायद इसलिए

आज दो-तीन बार ऐसा हो गया है कि बस के आगे बिजली आकर गिरी है| इसलिए अगर हमने उस आदमी को बस से नहीं उतारा तो आज हमारी मौत पक्की हैं|

यात्रियों ने कहा कि हाँ बात तो तुम सही कर रहे हो लेकिन यह पता कैसे लगाया जाए की वह व्यक्ति कौन हैं?

तभी बस के ड्राइवर ने कहा की चलो एक काम करते हैं,वो बस के सामने जो एक पेड़ दिख रहा हैं| वह पेड़ कम से कम सौ से डेढ़-सौ मीटर की दूरी पर होगा|

वहाँ पर हम सभी एक-एक कर जायेंगे और उस पेड़ को छूकर आएँगे| ऐसे में जो भी जिसको ऊपर वाला ले जाना चाहता हैं,उसे वह खुद अपने-आप लेकर चला जाएगा|

लोगों ने कहा ठीक है कर लेते हैं परन्तु सबका दिल अंदर ही अंदर धड़क रहा था कि वह इंसान मैं तो नहीं हूँ|

लोगों ने बस से उतरकर पेड़ को छूना शुरू किया और अपनी सीट पर आकर वापस बैठ गए| ऐसे ही यह सब चलता रहा बस का Conductor और Driver भी डरते हुए गए और वापस आ गए अंत में सभी लोग वापस आ गए|

अब वहाँ पर केवल एक आदमी बचा था,अब उस आदमी को सारे बस वाले कहने लगे कि पक्का यही आदमी होगा जिसके चक्कर में हम सब फस गए|

वो व्यक्ति बस से उतरा और पेड़ की ओर जाने लगा अब उसे बहुत डर लग रहा था कि क्या मैं ही हूँ वो जिसके कारण यह सारे लोग फस गए|

वह डरते-डरते उस पेड़ के पास गया और उस को धीरे से छूआ और जैसे ही उस पेड़ को छूआ एक भयंकर बिजली गिरने की आवाज आई लेकिन वह बिजली उस आदमी पर नहीं बल्कि उस बस पर गिरी जिसमे वह सारे लोग थे|

बस में बैठे सारे लोग भगवान को प्यारे हो गए और वह केवल एक मात्र इंसान था जिसके कर्मों की वजह से वह सारे अभी तक बच पाए थे और उन्होंने ही उस व्यक्ति को बस से बाहर निकाल दिया|

Friends यह छोटी सी कहानी हमें सिखाती है कि हम दुनिया में हर सेकंड,हर घंटे, हर मिनट किसी ना किसी को Judge करते रहते हैं कि वो ऐसा हैं,वैसा हैं|

दोस्तों लोगों को Judge करना  बंद कीजिए और Mother Teresa ने भी कहा हैं कि अगर आप लोगों को केवल Judge करते रहेंगे तो उनसे प्यार कब करेंगे| दोस्तों अपनों से प्यार कीजिए उनके साथ अपना Time Spend कीजिए|

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Thank For Reading
Sanjana

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