विश्व के वो चार देश जो बहुत कम या बहुत ज्यादा आबादी की समस्या का सामना कर रहे हैं

आज के समय में जनसंख्या हर देश के लिए एक ऐसी चुनौती बनकर सामने आई हैं, जिसका सामना हर देश को करना पड़ रहा हैं| मेडिकल जर्नल लैंसेट में छपे एक अध्ययन के अनुसार दुनिया भर में फर्टिलिटी रेट में कमी हो रही हैं और इसका मतलब यह हैं कि इस सदी के अंत तक लगभग सारे देशों में जनसंख्या में कमी आएगी| लैंसेट की ये रिपोर्ट समाज पर इसके पड़ने वाले प्रभाव का भी जिक्र करती हैं| दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल उन चार देशों पर हैं, जो जनसंख्या में हो रहे नाटकीय बदलाव की समस्या से जूझ रहे हैं और इससे निपटने के लिए क्या-क्या  कदम उठा रहे हैं| तो आइये दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं-

  1. भारत

दूसरे देश अपने यहाँ प्रजनन दर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने यहाँ लोगों से छोटे परिवार रखने की अपील की हैं|

पिछले साल एक भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि, “जनसंख्या विस्फोट भविष्य में हमारे लिए कई तरह की समस्या पैदा करेगा| लेकिन एक ऐसा वर्ग भी हैं, जो बच्चे को इस दुनिया में लाने से पहले नहीं सोचता हैं कि क्या वो बच्चे के साथ न्याय कर सकते हैं, उसे जो चाहिए क्या वो उसे सबकुछ दे सकते हैं|”

मोदी ने कहा था कि इसके लिए समाज में जागरूकता लाने की आवश्यकता हैं|

भारत साल 2100 तक चीन को पीछे करते हुए दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा| हालांकि लैंसेट के शोधकर्ताओं का कहना हैं कि भारत की आबादी में कमी आएगी और इस सदी के अंत  तक भारत की आबादी एक अरब 10 करोड़ तक हो जाएगी| 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी अभी एक अरब 30 करोड़ हैं|

1960 में भारत में जन्म-दर 5.91 था जो अभी घटकर 2.24 हो गया हैं|

चीन-

दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला ये देश आज जन्म-दर में हो रही अत्यधिक कमी से जूझ रहा हैं|

चीन ने 1979 में अपने यहाँ एक बच्चे की योजना शुरू की थी| चीन ने अपने यहाँ बढ़ती आबादी और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को देखते हुए ‘वन चाइल्ड’ की योजना शुरू की थी|

लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार अगले चार साल में चीन की आबादी एक अरब 40 करोड़ हो जाएगी लेकिन सदी के अंत तक चीन की आबादी घटकर करीब 73 करोड़ हो जाएगी| सरकारी आँकड़ों के अनुसार साल 2019 में देखा गया था कि पिछले 70 सालों में चीन का जन्म दर सबसे निचले स्तर पर आ गया हैं|

कुछ लोगों को इस बात की आशंका है कि चीन एक ‘डेमोग्राफ़िक टाइम बॉम्ब’ बन गया है, जिसका आसान शब्दों में मतलब है कि काम करने वालों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है और उन पर अपने बड़े और रिटायर्ड हो रहे परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी बढ़ती जा रही हैं|

चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है, इसलिए चीन का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा|

चीन में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी से चिंतित होकर सरकार ने साल 2015 में एक बच्चे की नीति बंद कर दी और कपल को दो बच्चे पैदा करने की इजाजत दे दी|

इससे जन्म-दर में तो थोड़ा इजाफा हुआ लेकिन लंबे समय में ये योजना बढ़ती बुजुर्ग आबादी को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो सकी|

  1. नाइजीरिया

लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार साल 2100 तक सहारा रेगिस्तान के दक्षिण में बसे अफ्रीकी देशों की जनसंख्या तीन गुना बढ़कर करीब तीन अरब हो जाएगी|

इस रिपोर्ट के अनुसार इस सदी के आखिर तक नाइजीरिया की आबादी करीब 80 करोड़ हो जाएगी और जनसंख्या के कारण वो दुनिया का दूसरे सबसे बड़ा देश हो जाएगा| रिपोर्ट ये भी कहती हैं कि उस वक्त तक नाइजीरिया में काम करने योग्य एक बड़ी संख्या हो जाएगी और उनकी जीडीपी में भी बहुत वृद्धि होगी|

लेकिन बढ़ती जनसंख्या के कारण इसका बोझ देश के आधारभूत ढाँचों और सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ रहा हैं| नाइजीरिया के अधिकारी अब इस बारे में खुलकर बोलने लगे हैं कि जनसंख्या को कम करने के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत हैं|

वहां की वित्त मंत्री जैनब अहमद का कहना था कि, “हमारे यहाँ ऐसे कई परिवार हैं, जो अपने बच्चों को खाना भी नहीं खिला सकते हैं, आप अच्छी स्वास्थ्य सेवा और बेहतर शिक्षा की तो बात ही मत करिए| इसलिए हमें इस बारे में बात करनी चाहिए|

  1. ब्राजील-

ब्राजील में पिछले 40 वर्षों में प्रजनन दर में काफी कमी देखी गई हैं| साल 1960 में ब्राजील में प्रजनन दर 6.3 थी जो हाल के दिनों में घटकर केवल 1.7 रह गई हैं| लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार ब्राजील की आबादी 2017 में 21 करोड़ थी जो 2100 में घटकर 16 करोड़ के करीब हो जाएगी|

2012 के एक अध्ययन के अनुसार ज्यादातर टीवी धारावाहिकों में छोटे परिवार को ही दिखाया गया जिसका असर लोगों पर पड़ा और वहाँ जन्म-दर में कमी आती चली गई| ब्राजील में जन्म-दर में लगातार कमी आ रही हैं, लेकिन वहाँ किशोरों में बढ़ती प्रेगनेंसी एक नई समस्या बनकर उभर रही हैं|

इस पर काबू पाने के लिए सरकार ने एक कैंपेन शुरू किया है, जिसका टैगलाइन है, ‘किशोरावस्था पहले, गर्भावस्था बाद में|’ ब्राजील की महिला, “परिवार और मानवाधिकार मामलों की मंत्री डैमारेस एलवेस ने इस साल के शुरू में कहा था कि, “हमें किशोरों में बढ़ती प्रेगनेंसी को कम करना होगा| हममें ये कहने की हिम्मत थी कि हम शारीरिक संबंधों को देर से शुरू करने के बारे में बात करेंगे|”

दोस्तों, ‘आपको हमारा यह आर्टिकल विश्व के वो चार देश जो बहुत कम या बहुत ज्यादा आबादी की समस्या का सामना कर रहे हैं आप हमें कमेंट करके बताए और हमारे इस आर्टिकल को शेयर और लाइक करना ना भूले|

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Sanjana Singh


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