“जिंदगी में चाहे कितने बड़े क्यों ना हो जाओ, लेकिन माँ-बाप का साथ होना बहुत जरूरी होता है”-

दोस्तों जीवन में आप चाहें कितने भी बड़े क्यों ना हो जाओ| लेकिन एक बात ऐसी हैं, जिसे आप कभी भी नजरअंदाज नहीं कर सकते हो| दोस्तों वो बात है माताजी और पिताजी की सलाह| आप चाहें कितने भी बड़े व्यक्ति क्यों ना बन जाओ| लेकिन आपको कभी ना कभी अपने माता-पिता के सलाह की आवश्यकता जरूर पड़ेगी| दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल “जिंदगी में चाहे कितने बड़े क्यों ना हो जाओ, लेकिन माँ-बाप का साथ होना बहुत जरूरी होता है”  प्रेरणादायक कहानी पर हैं| तो आइए दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं-

नई नवेली दुल्हन की अपनी सास पसंद नहीं थी-

यह कहानी एक नई नवेली दुल्हन की हैं| वो जैसे ही अपने ससुराल में गयी, उसे अपनी सास से चिढ़ होने लगी| जैसा कि बाकी बहुओं को लगता है कि सास हमेशा टोकती हैं, फालतू की बात करती हैं| फालतू का ज्ञान देती है, जिसकी कोई जरूरत नहीं होती है| इस नई नवेली बहु को भी यहीं लगने लगा| उसने अपने पति से कहा कि क्यों ना हम इस घर को छोडकर के अलग जगह पर रहने लगते हैं| किराये पर एक घर के रहते हैं| पति को लगा की यह तो गलत हो रहा है| पति ने अपनी पत्नी को समझाया और बताया कि माँ तुम्हें सही कहती हैं|

पत्नी गुस्से में अपने मायके चली गई और अपने पिताजी से जहर की दवा माँगने लगी-

उसका पति अपनी माँ का पक्ष लेने लगा तो पत्नी को और गुस्सा आया| एक दिन को अपने पति से लड़कर के अपने मायके चली गई| उसके पिताजी एक वेद थे| उन्हें आयुर्वेदिक दवाओं का ग्यान तो था ही, वो सीधे अपने पिताजी के पास गयी और कहीं की पिताजी एक ऐसी दवाई दीजिए, एक ऐसी जहर की पुड़िया दीजिए कि मेरी सासु माँ हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो जाए| मैं बस उनसे पीछा छुड़ाना चाहती हूँ| मैं उनके साथ नहीं रहना चाहता हूँ|

उसके पिताजी ने उसे जहर नहीं दिया और उसको समझाया-

उसके पिताजी ने कहा कि बेटा मैं तुम्हें जहर की पुड़िया कैसे दे सकता हूँ? मैं तुम्हें जहर दूँगा, तुम जाकर के अपनी सास को जहर दोगी| फिर उनकी मौत हो जाएगी और फिर पुलिस तुम्हें उनकी हत्या करने के जुर्म में जैल ले जाएगी| फिर तुम तक जहर पहुँचाने के आरोप में वो मुझ तक पहुँचेगी और फिर मुझे भी जैल ले जाएगी और फिर ऐसे हमारा पूरा परिवार तबाह हो जाएगा|

उसके पिताजी ने उसे बहुत ही बढ़िया चाल बतायी-

अपने पिता की बातें सुनकर उस बहु ने कहा कि फिर आप ही बताएँ कि क्या करे| पिताजी ने कहा कि एक दूसरी दवाई देता हूँ| ये दवाई धीरे-धीरे, धीरे धीरे असर करेगी| उस दवाई को छह महीने तक रोजाना खाने में मिलाकर देना| तुम्हारी सासु माँ की तबियत रोजाना खराब होने लगेगी| वो कमजोर होने लगेगी और छह महीने बाद जब उनकी मौत होगी, तो किसी को पता भी नहीं चलेगा कि उनकी मौत का कारण क्या था|

बस इस दौरान अपने व्यहवार को थोड़ा बदल लेना| उनसे प्यार-मोहब्बत से बातें करना| ऐसा ना हो कि शक की सुई तुम्हारे तरफ आ जाए|

बहू के व्यावहार में बदलाव आ गया और धीरे-धीरे दोनों में प्रेम बढ़ गया-

वो जो नई नवेली बहु थी, बहुत खुश थी| उसको लगा कि यह बड़ी अच्छी बात हैं| पिताजी ने मुझे रास्ता दिखा दिया और फिर वो अपने पिताजी वो पुड़िया लेकर चली गई और रोजाना खाने में मिलाकर अपनी सास को देने लगी| सासु माँ की सेवा करने लगी, प्यार से बातें करने लगी| बहु के व्यावहार में बदलाव आ गया था| सास को लगा कि जब भी वो कुछ बोलती थी तो बहु उस बात पर रिएक्ट नहीं करती थी|

अब बहू को लगने लगा की सासू माँ मुझे अपनी बेटी जैसा ही प्यार करती हैं-

सास को भी अच्छा लगने लगा| दो महीना बीत चुके थे और उनमे धीरे-धीरे दोस्ती होने लगी थी| धीरे-धीरे उनका रिश्ता और प्रकार होने लगा और बहू को लगने लगा कि ये तो बिल्कुल मेरी माँ जैसी हैं| ये मुझे माँ जैसा प्यार करती है और मुझे अपनी अपनी बेटी मानती है|

जब छठा महीना करीब आया तो बहु को अपनी गलती का अंदाजा हुआ और उसने सुधारने के लिए वो अपने पिताजी के पास गयी –

वो छठा महीना आने वाला था, जो पिताजी ने कहा था कि सासु माँ की मौत हो जाएगी| वो दौड़ करके अपने पिताजी के घर गयी और अपने पिताजी से बोली कि पिताजी की मदद कीजिए| कोई ऐसी दवाई दीजिए जिससे कि उस दवाई का असर कम हो जाए|

उसके पिताजी ने उसे अपनी सारी योजना बतायी-

 यह बात सुनकर उसके पिताजी हसने लगे और बोला के वो दवाई, वो पुड़िया किसी को मारने वाली दवाई नहीं थी| बल्कि वह हाजमें वाली दवाई की पुड़िया थी और मैंने उसे सिर्फ तुम्हें इसलिए दिया था कि तुम्हारे मन को शांतवना मिले और तुम्हारे व्यावहार में बदलाव हो सके| घबराओ मत तुम्हारी सासु माँ को कुछ नहीं होने वाला है|

दोस्तों यह छोटी सी कहानी एक बहुत ही अच्छी बात सिखाती है कि परवरिश बहुत ही  जरूरी चीज है और जिंदगी में कभी भी आपको लगे कि आपको सब कुछ आ गया हैं| तभी भी आपको माँ-बाप के सलाह की जरूरत रहेगी| माता-पिता का साथ बराबर अपने साथ लेकर चलते रहिए| चाहे माताजी हो, पिताजी हो, सासु माँ हो या ससुर जी हो, बस अपनों से बड़ों का सम्मान कीजिए| आपकी जिंदगी में खुशियाँ पक्का आएगी|

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