चीन ने कैसे भारत के अक्साई चिन को अपने कब्जे में किया|

वह रेखा जो भारतीय कश्मीर के क्षेत्रों को अक्साई चिन से अलग करती हैं ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ के रूप में जानी जाती हैं| अक्साई चीन भारत और चीन के बीच चल रहे दो मुख्य सीमा विवाद में से एक हैं| प्राचीन काल में य़ह भारत का ही हिस्सा था| परंतु चीन ने अपनी सेना की शक्ति से इसे अपने कब्जे में कर लिया था| परंतु अब भारत इसे वापस चीन से लेने में जुट गया हैं| दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल अक्साई चिन को लेकर चल रहे भारत और चीन के बीच के विवाद पर हैं| तो आइए दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं-

अक्साई चिन कहाँ स्थित हैं?
अक्साई चिन भारत, पाकिस्तान और चीन के संयोजन
में तिब्बती पठार के उत्तर-पश्चिम इलाके में स्थित एक विवादित क्षेत्र हैं| अक्साई चिन को अक्सेचिन के नाम से भी जाना जाता हैं| अक्साई चिन कुनलुन पर्वत के ठीक नीचे स्थित हैं| अक्साई चिन समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊँचाई पर हैं| चीन ने इस हिस्से पर कब्जा अवैध रूप से कर रखा हैं|

भारत चीन से कितना एरिया वापस लेना चाहता हैं?
दरअसल पाकिस्तान ने POK का 5180 बर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को गिफ्ट में दे दिया था और चीन पहले से ही 38000 बर्ग किलोमीटर क्षेत्र कब्जा करके बैठा हैं, तो इस हिसाब से चीन के पास कुल 43180 बर्ग किलोमीटर क्षेत्र हो गई| तो अब भारत चीन से इतना ही एरिया वापस लेने की तैयारी में हैं|

चीन को सता रहा हैं, अक्साई चिन गवांने का डर-
5 अगस्त, 2020 को लद्दाख को UT बनाने पर चीन ने आपत्ति जताई थी| अक्साई चीन से होकर तिब्बत से  शिंजियांग प्रांत तक जाने का रास्ता बहुत ही आसान हैं| अगर यह रास्ता नहीं होगा, तो काराकोरम रेंज होकर जाना पड़ेगा| अगर भारत अक्साई चिन की तरफ बढ़ेगा, तो चीन को न सिर्फ अक्साई चिन खोने का डर हैं, बल्कि चीन शिंजियांगप्रांत भी खो सकता हैं, जहां वह उईगुर मुस्लिमों को प्रताड़ित करता रहा हैं|

अक्साई चिन का इतिहास-
सन् 1947 से पहले कश्मीर रियासत का हिस्सा था| उस समय राजा हरि सिंह ने विलय का समझौता किया| उस काल में कानूनी तौर पर अक्साई चिन भारत का हिस्सा माना जाता था| सन् 1947 के पश्चात् चीन ने घुसपैठ करना शुरू किया| सन् 1947 के दौरान की नेहरू सरकार उन घुसपैठियों को रोकने में नाकाम रही और फिर इसके बाद सन् 1957 तक चीन ने शिंजियांग से तिब्बत तक के रास्ते की एक  सड़क बना ली|

इसके बाद सन् 1962 में युद्ध हुआ था, लड़ाई के पश्चात चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा करने में सफलता प्राप्त की| उस समय हमारी सेना उनकी सेना से लड़ने में सक्षम नहीं थी| परंतु अब हमारी सेना सक्षम ही नहीं बल्कि दुश्मनों के छक्के छुड़ा देने वालो में से हैं| इसलिए अब भारत चीन से अक्साई चिन को छोड़ने के लिए कह चुका हैं|

अक्साई चिन चीन के कब्जे में नहीं होता, अगर यह सब नहीं हुआ होता-

  1. अगर सन् 1950 में नेहरू जी सरकार सावधान हो जाती|
  2. अगर नेहरू सरकार चीन की घुसपैठियों को समय रहते ऐसा करने से रोक देती|
  3. अगर उस समय में नेहरू सरकार ने चीन को सड़क नहीं बनने दी होती|
  4. अगर नेहरू सरकार ने सेना की शक्ति की अहमियत को समझते और समय रहते सेन्य शक्ति का प्रदर्शन करते|
  5. अक्साई चिन गवांने के पीछे काएककारण यह भी हैं कि अगर सन् 1962 में हमारी भारत की सेना चीन से बेहतर होती|

अक्साई चिन का सामरिक महत्व

अक्साई चिन चीन के शिंजियांग और तिब्बत को जोड़ता हैं| यह मध्य एशिया की सबसे बड़ी जगह हैं|
ऊँचाई पर होने से इसे सामरिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बहुत अहम हैं| अक्साई चिन से चीन की सेना भारत पर नजर रख सकती हैं| 1950 के दशक में चीन ने अक्साई चिन में एक सड़क बनाई, जो कि शिंजियांग और तिब्बत को जोड़ती हैं|

दोस्तों, ‘आपको हमारा यह आर्टिकल चीन ने कैसे भारत के अक्साई चिन को अपने कब्जे में किया| आप हमें कमेंट करके बताए और हमारे इस आर्टिकल को शेयर और लाइक करना ना भूले|

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Sanjana Singh


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