क्या कोरोना वायरस महामारी खत्म होने की ओर हैं? 

साढ़े साठ लाख मामलों और एक लाख से अधिक मौतों के बाद भारत में कोरोना वायरस महामारी की रफ्तार धीमी हो रहीं हैं| भारत में इस महीने हर दिन औसतन चौसठ हजार केस आए, जो कि सितंबर के आखिरी दो हफ्ते के औसतन से कम हैं, जब 86 हजार केस आ रहे थे| इससे पहले सितंबर महीने में औसतन 93 हजार केस प्रतिदिन आ रहे थे| राज्यों में मरने वालों की संख्या भी कम हो गयी है| हालांकि टेस्टिंग की संख्या पिछले महीनों के मुकाबले बढ़ी है| दोस्तों हमारा आज का आर्टिकल “क्या कोरोना वायरस महामारी खत्म होने की ओर है” पर हैं| तो आइए दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल को पढ़ते हैं| 

जानकारों को अभी इसके प्रति क्या माना हैं? 

देखने से ऐसा लग रहा है कि महामारी का प्रभाव कम हो रहा है| लेकिन जानकारों का मानना हैं कि इन संख्याओं को एहतियात के साथ पढ़ना चाहिए| उनका माना है कि संख्याओं में कमी आना एक सकारात्मक सिग्नल है| 
लेकिन यह कहना कि महामारी खत्म हो रहीं हैं, जल्दबाजी होगी| क्योंकि सिर्फ टेस्ट का बढ़ना और मामलों का गिरना ही किसी महामारी को समझने के लिए काफी नहीं हैं| 

कोरोना वायरस के टेस्ट फिलहाल किन-किन तकनीकों से हो रहे हैं-

हर दिन होने टेस्ट में से आधे रैपिड एंटीजेन तकनीक से किए जा रहे हैं| इससे नतीजे जल्दी आ रहे हैं| ये तकनीक के फ़ायदे भी हैं, लेकिन कई मामलों में यह सटीक नतीजे नहीं देती हैं| कई बार 50 प्रतिशत तक नतीजे गलत होते हैं| वहीं पी. सी. आर तकनीक से नतीजे आने में वक्त भी लगता है और यह महंगा भी है| 
देश के जाने माने वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील के मुताबिक संक्रमण के मामलों में कमी रैपिट टेस्टिंग के गलत नतीजों के कारण है या सही में मामले कम हो रहे हैं, यह कहना मुश्किल हैं|
उनके मुताबिक इसका पता तभी लगाया जा सकता है, जब सरकार डेटा जारी कर बताए कि कितने पीसीआर टेस्ट और कितने एंटीजेन टेस्ट किए जा रहे हैं| तभी हर दिन आने वाले मामलों से तुलना की जा सकती है| 

किस तरह टेस्टिंग में इजाफा हुआ है-

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ श्रीनाथ रेड्डी के मुताबिक भारत में ऑन डिमांड टेस्टिंग शुरू हो गई हैं, जिसके कारण यह मुमकिन है कि बिना लक्षण वाले लोगों की टेस्टिंग में इजाफा हुआ हो|
हालांकि कई एंटी बॉडी सर्वे और दूसरी रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में रिपोर्ट नहीं किए गए मामलों की संख्या बहुत अधिक है|

मिशिगन विश्वविद्यालय के ब्र्हामर मुखर्जी का इसके प्रति क्या मत हैं-

मिशिगन विश्वविद्यालय के ब्र्हामर मुखर्जी, जो इस महामारी को ट्रैक कर रहे हैं, बताते हैं कि भारत में संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या 12 से 13 करोड़ तक हो सकती है, जो कि आबादी का करीब 10 फीसद हैं|
देशभर में हुए एंटीबॉटी टेस्ट बताते हैं कि करीब 9 करोड़ लोग संक्रमित चुके हैं, जो कि आधिकारिक आंकड़ो से 15 गुना अधिक हैं|

इसका पता कैसे लगाया जा सकता है कि महामारी की रफ्तार धीमी हो रहीं हैं या नहीं-

फिर ये कैसे पता चलेगा कि महामारी की रफ्तार धीमी हो रही है या नहीं| डॉक्टर रेड्डी के मुताबिक, मौत के आंकड़ों को ट्रैक करने से ये जानकारी मिल सकती है|
अगर थोड़े कम मामले भी रिपोर्ट किए जा रहे है, तब भी मरने वाले के सात दिन का मूविंग एवरेज बता सकता है ट्रेंड गिर रहा है या नहीं| हमें इस पर ध्यान रखना होगा|
किसी भी महामारी के चार चरण होते हैं-
महामारी के चार मुख्य चरण होते हैं – स्पार्क, ग्रोथ, पीक और डिक्लाइन| 
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन के एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के वैज्ञानिक एडम कचरास्की के मुताबिक कई मामलों में सभी चरण कई बार आते हैं|
साल 2009 का स्वाइन फ्लू-
साल 2009 में स्वाइन फ्लू बहुत तेजी से बढ़ा और जुलाई में पीक पर पहुँचा| इसके बाद फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई और अक्टूबर के अंत में एक और पीक आया|
डॉक्टर मुखर्जी का इसके प्रति क्या मत है-
डॉक्टर मुखर्जी के मुताबिक सुरक्षा का ये अहसास क्षणिक और अल्पकालिक हैं| त्योहारों का मौसम आने वाला है और तब लोग एक दूसरे से ज्यादा मिलेंगे और एक सूपरस्प्रेडर इवेंट से वायरस का कोर्स दो हफ्ते के अंदर ही बदल सकता हैं|
हमें इसके प्रति एहतियात बरतनी होगी-
यह जरूरी है कि हम एहतियात बरतते रहें, मास्क का इस्तेमाल करते रहें और हाथ धोने की आदत को जारी रखें और भीड़भाड़ से दूर रहें|

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